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मुश्किल में CM के सचिव का स्टिंग करने वाले पत्रकार!

Mon, 03 Aug 2015 01:40 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 03 Aug 2015 01:40 PM IST
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uttarakhand cm personal secretary sting case.

उत्तराखंड के सीएम के सचिव के कथित स्टिंग की जांच तो दो कदम भी नहीं बढ़ी, लेकिन स्टिंग प्रसारण के पीछे जिन अशोक पांडेय का नाम आया, वह सरकार के निशाने पर आ गए हैं।

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एमडीडीए ने उनके घर को गिराने को नोटिस दरवाजे पर चस्पा कर दिया है और तीन दिन का समय दिया है। इधर, अशोक पांडेय ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए उच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया है।
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उत्तराखंड ही नहीं देश भर की राजनीति में भूचाल लाने वाले सीएम हरीश रावत केसचिव मोहम्मद शाहिद के स्टिंग आपरेशन में जांच तो शुरू नहीं हुई लेकिन विरोधी पक्षकारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है।
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इस मामले की दिल्ली में विगत 22 जुलाई को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के कारण पत्रकार अशोक पांडेय सरकार के निशाने पर आ गए है। इस कार्रवाई को पिछले दिनों सीएम के उस बयान से जोड़कर भी देखा जा रहा है जिसमें स्टिंग में शामिल लोगों की संपत्ति की जांच कराने की बात कही गई है।

पांडेय का नारी शिल्प मंदिर मार्ग पर टैगोरविला में निर्माणाधीन मकान है। उन्होंने बताया कि इस घर का नक्शा पहले बन गया था उसकी पांच साल की मियाद 2011 में समाप्त हो गई और निर्माण शुरू नहीं हो सका। बाद में खंडूड़ी सरकार ने नियमावली बदली तो रिवाइज मैप कम्पाउंडिंग के लिए जमा करा दिया गया।

अब तीन महीने की अलग अलग बैक डेट के नोटिस बनवाकर विगत दस जुलाई को घर गिराने का आदेश दर्शाया और दो दिन पहले नोटिस चस्पा कर चार अगस्त को मकान गिराने को कहा है। चस्पाने के बाद फोटो खींचा और खुद ही फाड़ दिया।

इस मामले में एमडीडीए का पक्ष लेने के लिए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम व सचिव पीसी दुम्का से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया। पांडेय इस मामले को लेकर और सीडी प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय चले गए है।

वह सोमवार को एक रिट दाखिल कर पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग करेंगे। यदि उच्च न्यायालय से कुछ राहत नहीं मिली तो फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

कहां से आएगी स्टिंग की ओरिजनल सीडी

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सीएम के सचिव मोहम्मद शाहिद की सीडी को लेकर वैज्ञानिक और वैधानिक पेंच शुरू हो गए है। जांच अधिकारी मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने डीजीपी से फारेंसिक जांच की रिपोर्ट मांगी, लेकिन डीजीपी का कहना है कि वह ओरिजनल सीडी का इंतजार कर रहे है।

सवाल यह है कि ओरिजनल सीडी कहां है और कैसे मिलेगी, इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है। स्टिंग आपरेशन की सीडी की कहानी सुलझने के बजाय हर रोज उलझती जा रही है। जांच आगे कैसे बढ़े यही उलझन मामले को सुलटने नहीं दे रही। जांच अधिकारी का कहना है कि इस प्रकरण की जांच ही फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद शुरू होगी।

डीजीपी बीएस सिद्धू मानते है कि यदि ओरिजनल सीडी नहीं होगी तो फोरेंसिक जांच संदिग्ध रहेगी, इसलिए वह ओरिजनल सीडी का इंतजार कर रहे है। लेकिन सवाल यह है कि ओरिजनल सीडी कहां है। शासन और पीएचक्यू को कौन ओरिजनल सीडी देगा, यह भी बड़ा सवाल है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ओरिजनल सीडी की फोरेंसिक जांच कराई जाती है तो ठीक है, वर्ना मामला संदेहास्पद बना रहेगा। क्योंकि यह मामला सीएम से जुड़ा है इसलिए शासन और पीएचक्यू दोनों ही पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को समझ रहे है। इसलिए ना तो जांच अधिकारी और ना ही डीजीपी हड़बड़ी में कदम उठाने केपक्ष में नहीं दिख रहे है।

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