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विस चुनाव का काउंट डाउन शुरू, मैं तैयार हूं: CM रावत
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 08 Oct 2015 08:28 PM IST
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अगले विधानसभा चुनाव के लिए मुझे भाजपा की आक्रामकता और सरकार के खिलाफ एंटी इन्कमबैंसी का कोई डर नहीं है।
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कारण कि भाजपा जितना माहौल खराब करेगी, हमें उतना ही फायदा होगा। फिर सरकार के खिलाफ वैसे भी कोई एंटी इन्कमबैंसी फैक्टर नहीं है। मुझे डर है तो कांग्रेस के भीतर की एंटी इन्कमबैंसी का। अगर मेरे सभी मित्रों (कांग्रेसियों) ने इस पर काबू पा लिया तो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 45 सीटें मिलेंगी।
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वरना, सामान्य बहुमत के साथ तो वापसी तय है ही। ‘अमर उजाला’ के साथ खास बातचीत में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपनी बेबाक राय दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ कोई माहौल नहीं है और न ही सरकार के लिए कोई एंटी इन्कमबैंसी फैक्टर है। भाजपा मुगालते में है।
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चुनावी समर का काउंट डाउन शुरू हो चुका है, बस देखते जाइए। मैं चुनाव में बताऊंगा कि मेरी रणनीति क्या होगी। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा के साथ ही अपने उस सिस्टम से भी जूझ रहा हूं जिससे काम कराना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन लगता है।
भाजपा तो विरोधी दल है ही, लेकिन मेरे लिए तो ये सिस्टम भी ऐसा ही हो गया है। जनहित का एक काम कराने के लिए मुहिम चलानी पड़ती है, जबकि मेरे किसी साथी का कोई निजी एजेंडा हो तो फाइल फर्राटे भरने लगती है।
गांव से पहले ग्रामीणों की आर्थिकी सुधारने का प्लान
मुख्यमंत्री हरीश रावत का मानना है कि गांव का एकीकृत विकास होने से पहले जरूरी है कि गांव में रहने वाले परिवारों की आर्थिकी बढ़ाई जाए। तभी गांव से पलायन रुकेगा और विकास होगा।
ग्रामीण परिवेश के विकास की जमीनी हकीकत पर मुख्यमंत्री हरीश रावत से विस्तृत बात हुई तो उन्होंने खुद का फार्मूला सामने रखा। कहा पिछले एक डेढ़ साल में तमाम ऐसी योजनाएं लागू की गईं, जिनके तहत ग्रामीण अंचल में रहने वाले 75 फीसदी से ज्यादा लोग सीधे तौर पर लाभान्वित हुए। प्रस्तुत है मुख्यमंत्री से बातचीत के प्रमुख अंश :-
प्र : गांवों के विकास का सरकार के पास क्या ब्लू प्रिंट है?
उ : मैं पहले गांव में रहने वाले हर व्यक्ति की आर्थिकी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा हूं। मेरा गांव मेरी सड़क, मेरा वृक्ष मेरा धन, गाय गंगा योजना, निराश्रित महिलाओं को निशुल्क गाय देने जैसी तमाम योजनाएं हैं जो कि व्यक्तिगत तौर पर किसी परिवार की आर्थिकी को मजबूत बनाती हैं। हर योजना का ब्यू प्रिंट उसी तरह से तैयार हुआ कि हर हाल में गांव में रहने वाला व्यक्ति उसकी परिधि में आ जाए। इसमें हम सफल रहे, नतीजे कुछ दिन बाद सामने होंगे।
प्र : ऐसा कौन सा कदम उठाया, जिससे गांव के परिवारों की आर्थिकी सुधरी है?
उ : मैंने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से काफी कुछ सीखा। उदाहरण के तौर पर हरिद्वार के तराई में पेठा बहुत पैदा होता है, हमने उसे मंडी तक भिजवा दिया और यूपी के खादर से आने वाले पेठे पर एंट्री टैक्स लगा दिया। इसका लाभ प्रदेश के छोटे किसानों को मिला, जिसका असर जल्द दिखेगा। मंडुवा, झंगोरा, चौलाई के दाम बढ़ा दिए, जिसने गांव के पैसे को गतिमान किया। दुग्ध उत्पादन समितियों को चार रुपये प्रति लीटर बोनस दिया तो मुनाफे वाली दुग्ध उत्पादन समितियों की संख्या एक से बढ़कर पांच हो गई।
प्र : गांव के लिए आगे की क्या योजना है?
उ : भविष्य में गांव की 25 प्रतिशत आबादी को पूरी तरह से दुग्ध उत्पादन में भागीदार बनाना है। 25 प्रतिशत के लिए एग्रीकल्चर है और बाकी के लिए भी उद्यानिकी के क्षेत्र में अवसर पैदा करने हैं। जिस एफएल-2 को लेकर भाजपा हल्ला कर रही है, उसके पीछे का मकसद उद्यान को आगे बढ़ाना है। वाइनरी स्थापित होंगी। पहाड़ में खराब होने वाला माल्टा, नींबू आदि अन्य फलों की खपत इसी वाइनरी में होगी, इससे किसान मजबूत होगा। किसान का मतलब ही गांव है।
प्र : शिक्षा के क्षेत्र में पहाड़ में सुधार क्यों नहीं हो रहा?
उ : पहले मैंने निजी क्षेत्र को आमंत्रित किया था पहाड़ में स्कूल बनाने के लिए। लेकिन कोई आगे नहीं आया। अब दूसरा प्रयोग करूंगा। मौजूदा सिस्टम में काम करना भी आसान नहीं है। विधायकों से कहूंगा कि अपनी निधि से एक-एक स्कूल बना दो।
प्र : आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण और आरक्षण के मसले का क्या हुआ?
उ : चिह्नीकरण का काम मुश्किल जरूर है, लेकिन जल्द पूरा होगा। जटिलताएं अपनी जगह हैं। मुझसे बुजुर्ग महिलाएं पूछती हैं कि सिर पर हाथ रखकर कसम खाओ कि हम आंदोलन में शामिल नहीं थे, यदि थे तो पेंशन क्यों नहीं? तकनीकी दिक्कतें हैं। किसी का नाम मुकदमे में नहीं तो किसी का अखबारों में नहीं आया, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं कि वे आंदोलनकारी नहीं हैं। पेंशन भी सम्मान के रूप में दी है। अब समान पेंशन की बात नहीं होनी चाहिए। तीन राज्य एक साथ बने, कहीं लाभ नहीं मिला। हमने पेंशन दी और आरक्षण के लिए भी इसी सत्र में विधेयक रखेंगे।