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चमोली आपदा: डीएनए सैंपलिंग तो हो रही , लेकिन सैंपल सुरक्षित रखने के लिए नहीं है डीप फ्रीजर 

Sun, 14 Feb 2021 02:28 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 14 Feb 2021 02:28 PM IST
सार

  • माइनस 20 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पर रखना होता है सैंपल 
  • अभीतक लिए जा चुके हैं 40 से ज्यादा शवों और मानव अंगों के सैंपल 

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Uttarakhand Chamoli News: Deep Freezer Not Available for preserve DNA Sample

विस्तार

अज्ञात शवों और मानव अंगों की पहचान के लिए डीएनए सैंपलिंग तो हो रही है, लेकिन उन्हें सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था नहीं बन पा रही। बेहतर परिणाम के लिए सैंपलों को माइनस 20 डिग्री सेंटीग्रेट पर रखना आवश्यक है। इसके लिए ज्यादातर जगहों पर डीप फ्रीजर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में सैंपलों के डीग्रेड (खराब) होने का खतरा बना हुआ है।

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दरअसल, आपदा के बाद अज्ञात शवों और मानव अंगों का डीएनए कराए जाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए फोरेंसिक टीम भी भेजी गई थी। फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में मेडिकल स्टाफ ने अब तक लगभग 17 मानव अंगों और 25 अज्ञात शवों से डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं। 
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फोरेंसिक सूत्रों के अनुसार वहां पर चमोली के विभिन्न इलाकों (जोशीमठ, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर आदि) से यह सैंपल लिए जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर जगहों पर डीप फ्रीजर की व्यवस्था नहीं है। जबकि, सैंपलों को रखने के लिए सीएचसी या पीएचसी में डीप फ्रीजर होना बेहद आवश्यक है। फोरेंसिक एक्सपर्ट के मुताबिक जल्दी परिणाम लेने के लिए ऐसा करना बेहद आवश्यक है। 

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शुरूआत में तो छोटे डिब्बे 

फोरेंसिक टीम के सूत्रों के अनुसार शुरूआत में तो सैंपल को रखने के लिए छोटे डिब्बे भी उपलब्ध नहीं थे। जैसे-तैसे कर प्रशासन से अनुरोध कर डिब्बों का इंतजाम किया गया। इसके बाद डीप फ्रीजर की मांग की गई तो पता चला कि तो आसपास किसी भी सरकारी अस्पताल या अन्य जगह पर डीप फ्रीजर नहीं हैं। इसके बाद सीडीओ चमोली और सीएमओ से गुजारिश कर एक छोटा डीप फ्रीजर गोपेश्वर में मिला। 

अंगों के टिशू सही रहते हैं तो जल्द मिलते हैं परिणाम 
फोरेंसिक एक्सपर्ट के मुताबिक हड्डियों, बालों या अन्य हिस्सों के माध्यम से भी डीएनए प्रोफाइल तैयार हो जाती है। मानव अंग के टिशू (ऊतक) यदि सुरक्षित रहें तो यह परिणाम जल्द या यूं कहें कि कुछ घंटों और दिनों में ही आ जाते हैं। इन टिशू को सुरक्षित रखने के लिए ही सैंपलों को माइनस 20 डिग्री सेंटीग्रेट पर रखना आवश्यक होता है। यदि उन्हें सामान्य तापमान पर रखा जाता है तो वह जल्द ही खराब हो जाते हैं। इससे डीएनए प्रोफाइल तैयार करने में महीनों लग जाते हैं। 

फिलहाल कोई दिक्कत की बात सामने नहीं आयी है। यदि, किसी तरह की परेशानी सामने आती है तो संबंधित विषय में बात की जाएगी। साथ ही सभी
संसाधनों को उपलब्ध कराने की पूरी कोशिश है।
-अशोक कुमार, डीजीपी

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