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उत्तराखंडः ऋषिगंगा आपदा का 21वां दिन, कुल 72 शव बरामद, अभी भी 132 लोग लापता

Sat, 27 Feb 2021 04:17 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोशीमठ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 27 Feb 2021 04:17 PM IST
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Uttarakhand Chamoli News: Debris Removing from tapovan tunnel Continues on 21 day
सुरंग में जमा पानी - फोटो : अमर उजाला

विगत सात फरवरी को उत्तराखंड में चमोली जिले के ऋषिगंगा में आई आपदा के 21वें दिन भी लापता लोगों की खोज जारी है। वहीं शुक्रवार को कालेश्वर के पास नदी किनारे एक शव मिला। जिसके बाद अब आपदा में लापता 204 में से 72 शव और 30 मानव अंग मिल चुके हैं। अभी भी 132 लोग लापता हैं।

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शुक्रवार देर शाम मारवाड़ी से भी एक शव बरामद हुआ। इससे पहले कालेश्वर के पास से भी एक शव बरामद किया गया था। जिसके बाद अब 132 लोग लापता चल रहे हैं, जबकि दो व्यक्ति पूर्व में सुरक्षित मिले थे। अब तक मिले शवों में से 41 की शिनाख्त की जा चुकी है।
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यह भी पढ़ें... चमोली जल प्रलय: अब तक 71 शव हो चुके बरामद, आपदा प्रभावितों से मिलीं पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती
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वहीं तपोवन और रैणी में रेस्क्यू अभियान जारी है। बार-बार पंपिंग मशीन द्वारा सुरंग से पानी निकाला जा रहा है और मलबा हटाने का कार्य किया जा रहा है। तपोवन सुरंग के अंदर एसएफटी (सिल्ट फ्लशिंग टनल) के मुहाने तक मलबा हटा दिया गया है, लेकिन पानी का रिसाव अधिक होने के कारण यहां मलबा हटाने के काम में बाधा आ रही है। 
 

जोशीमठ थाने में 205 लोगों की गुमशुदगी दर्ज

आपदा के बाद से जोशीमठ थाने में 205 लोगों की गुमशुदगी दर्ज है, जिसमें से 71 शव बरामद हो चुके हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ तपोवन और रैणी क्षेत्र में खोज अभियान में जुटी हुई है। एनटीपीसी से मिली जानकारी के अनुसार टनल के एसएफटी प्वाइंट के मुहाने तक मलबा हटा लिया गया है।

 

यहां से टनल नीचे की तरफ है, लेकिन पानी का रिसाव बहुत अधिक होने से आगे बढ़ना फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है। यहां पर तीन पंपों से पानी बाहर निकाला जा रहा था। अब एक और पंप लगाकर पानी बाहर फेंका जा रहा है।

पानी कम करने का किया जा रहा है प्रयास

 

जब तक पानी का रिसाव कम नहीं होता तब तक आगे बढ़ना खतरनाक है। आगे टनल नीचे की तरफ है, जिससे यदि पानी तेज हुआ तो बचाव कर्मियों के लिए खतरा हो सकता है। फिलहाल पानी कम करने का प्रयास किया जा रहा है। 

एनटीपीसी ने 25 श्रमिकों का मुआवजा कोर्ट में किया जमा

एनटीपीसी ने आपदा में मारे गए तपोवन विष्णगाड़ जल विद्युत परियोजना के 25 श्रमिकों का मुआवजा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिला कोर्ट में जमा कर दिया है। कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम 1923 के तहत यह मुआवजा दिया जा रहा है। ऋषिगंगा आपदा में एनटीपीसी  की तपोवन विष्णुगाड़  परियोजना के 139 श्रमिक लापता हो गए थे।

कंपनी ने पीड़ित परिवारों को कामगार क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत भुगतान की  प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी की तरफ से बताया गया कि राज्य सरकार ने 25 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र कंपनी को मुहैया कराए हैं। जिसके तहत शनिवार को सभी 25 मृतकों के लिए क्षतिपूर्ति राशि तीन करोड़ 52 लाख रुपये कोर्ट में जमा कराए गए।

इस अधिनियम के तहत संविदा कर्मियों को मिलने वाली मासिक आय, कौशल आदि की गणना के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया जाता है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि जैसे ही सरकार की तरफ से अन्य श्रमिकों के मृत्यु प्रमाण पत्र मुहैया कराए जाएंगे, अधिनियम के अनुसार क्षतिपूर्ति राशि कोर्ट में जमा की जाएगी।

यह मुआवजा पीड़ित संविदा कर्मियों के पीड़ित परिवार को मिलने वाले 20 लाख के मुआवजे से अतिरिक्त है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि आपदा से पीड़ित परियोजना के श्रमिकों के परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी। कंपनी उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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