उत्तराखंड विस सत्र 2020: भूमि के सर्किल रेट रिवाइज करेगी सरकार, संसदीय कार्यमंत्री ने की घोषणा
- संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा, 15 दिन में केस टू केस आधार पर होगी रिवीजन
- पौड़ी में सबसे अधिक 529 प्रतिशत हुआ इजाफा
- पूरे प्रदेश में औसतन पांच प्रतिशत सर्किल रेट बढ़ने का दावा
- कांग्रेस लेकर आई कार्य स्थगन प्रस्ताव, सदन में खारिज
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश में भूमि के बहुत अधिक बढ़े हुए सर्किल रेटों को सरकार रिवाइज करेगी। शनिवार को सदन में कांग्रेस के कार्य स्थगन प्रस्ताव के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने यह घोषणा की। कौशिक ने कहा कि यह काम 15 दिन के अंदर किया जाएगा। सरकार ने स्वीकार किया कि पौड़ी में सबसे अधिक सर्किल रेट करीब 529 प्रतिशत बढ़े हैं।
शनिवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सर्किल रेट के मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव लेकर आई। विधानसभा अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को नियम 58 के तहत स्वीकार किया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि प्रदेश में सरकार ने कई स्थानों पर भूमि के सर्किल रेट 300 से 600 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। कई जगह पर बाजार भाव से अधिक सर्किल रेट हो गए हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि इससे प्रदेश का राजस्व भी प्रभावित हुआ है। जवाब में संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि यह सही है कि कुछ स्थानों पर सर्किल रेट बहुत अधिक हुए हैं। सर्किल रेट में कई तरह की खामियां थीं। इन खामियों को दूर करते हुए ही सर्किल रेट तय किए गए हैं।
कौशिक के मुताबिक पूरे राज्य में मात्र पांच प्रतिशत ही औसत रूप से सर्किल रेट में इजाफा हुआ है। फिर भी सरकार के सामने अधिक सर्किल रेट के मामले आएंगे, तो 15 दिन के अंदर इन मामलों को निपटाया जाएगा। कई स्थानों पर बाजार भाव बहुत अधिक और सर्किल रेट बहुत कम थे। इस कमी को देखते हुए ही सरकार ने सेटेलाइट सर्वे कराया था।
कांग्रेस ने की कमेटी बनाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सर्किल रेट रिवाइज करने के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह कमेटी सभी जगह का परीक्षण कर ले और सर्किल रेट पर सरकार को सुझाव दे। सरकार को इसमें परेशानी भी नहीं होनी चाहिए। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कमेटी बनाने की मांग तो स्वीकार नहीं की लेकिन कहा कि जहां-जहां से सर्किल रेट को लेकर किसी की मांग आएगी। वहां सर्किल रेट का परीक्षण कर मामले का निस्तारण किया जाएगा।
मुआवजा मिल रहा बेहद कम...
- श्रीनगर गढ़वाल में नदी के एक तरफ लोगों को 143 रुपये प्रति वर्ग मीटर और दूसरी तरफ 857 रुपये प्रति वर्ग मीटर का सर्किल रेट मिल रहा है।
- कर्णप्रयाग-ऋषिकेश परियोजना के तहत ही कई स्थानों पर लोगों को सर्किल रेट कम होने से लोगों को 50 गुना कम मुआवजा मिल रहा था। इसी तरह ऑलवेदर रोड परियोजना के तहत लोगोें को बहुत कम मुआवजा सर्किल रेट कम होने की वजह से मिल पा रहा था।
विपक्ष का तर्क
- सर्किल रेट कई स्थानों पर बाजार भाव से अधिक हैं। ऐसे में लोग जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं।
- सरकार का ध्यान सिर्फ राजस्व बढ़ाने पर रहा, लोगों की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया।
- लोगों को मजबूर होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है। व्यापार खत्म हो रहा है।
हल्द्वानी में 300 से 600 प्रतिशत बढ़ा
- नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र हल्द्वानी में ही सर्किल रेट 300 से 600 प्रतिशत तक बढ़ें हैं। कई लोगों ने उनसे यह शिकायत भी की।
कांग्रेस का कार्यस्थगन प्रस्ताव...
प्रदेश में सरकार हर साल सर्किल रेट का आकलन करती है। इस बार सर्किल रेट 300 से 600 प्रतिशत तक बढ़ा दिए गए हैं। आंतरिक मार्गों को भी मुख्य मार्गों की श्रेणी में रखकर 200 मीटर तक दरें तय की गई हैं। कई क्षेत्रों में 200 मीटर तक गांव ही समाप्त हो जाते हैं। सर्किल रेट बाजार भाव से कई गुना अधिक हो गया है। जरूरतमंद किसान अपनी भूमि को बेच नहीं पा रहे हैं। आम आदमी के लिए जमीन खरीदना मुश्किल हो गया है।
फोन तक मिल नहीं रहे, ऑनलाइन बजट देखेंगे कैसे
बजट सत्र के पांचवें दिन सदन में बजट दस्तावेजों के बहाने भराड़ीसैंण में अव्यवस्था का मसला भी गूंजा। सरकार ने कहा कि प्रदेश का बजट ऑनलाइन है। तो विपक्ष ने कहा कि फोन तक तो मिल नहीं रहे हैं, बजट ऑनलाइन क्या दिखेगा।
शनिवार को सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने सदन में व्यवस्था का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सदस्यों को बजट दस्तावेज में शामिल बजट - एक नजर दिया ही नहीं। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने कहा कि सरकार नेे भराड़ीसैंण में व्यवस्था की ही नहीं। पूरे क्षेत्र मेें संचार नेटवर्क की परेशानी है। चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि यहां फोन तक नहीं मिल रहे हैं और सरकार कह रही है कि बजट ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है।
जवाब में संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि बजट पैन ड्राइव में भी दिया गया है। उत्तराखंड उन चुनिंदा प्रदेशों में शामिल हैं जहां बजट ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है।
विपक्ष के तीर...
इस ई गवर्नेंस का फायदा क्या, जहां समस्या अधिक हो जाए और सुविधा गायब। बजट दस्तावेज ही पूरा उपलब्ध न कराकर सरकार चाहती है कि विपक्ष चर्चा भी तरीके से न करा पाए। सीडी से भी बजट डाउनलोड नहीं हो रहा है। - इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
सत्ता पक्ष की दलील
पूरा देश ई गवर्नेंस की ओर बढ़ रहा है। पेपरलैस होने की बात की जा रही है। सरकार ने इस वजह से बजट ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया है। पैन ड्राइव में भी बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। सीडी में भी बजट दिया गया है। - मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री