उत्तराखंड: समय से एंबुलेंस नहीं मिलने से भाजपा नेता की मौत, तीन अस्पतालों ने भर्ती करने से किया इंकार
- हल्द्वानी के तीन निजी अस्पतालों ने लेने से किया इंकार
- चौथे ने बरेली भेजा, भोजीपुर के अस्पताल में हुई मौत
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उत्तराखंड के चंपावत में समय पर आपात चिकित्सा सेवा 108 न मिलने से भाजपा के पाटी के पूर्व मंडल अध्यक्ष और पैरा लीगल वॉलंटियर सोबन सिंह मौनी की मौत हो गई। उन्होंने बरेली जिले के भोजीपुरा के अस्पताल में अंतिम सांस ली। पाटी से बरेली जाने से पूर्व उन्हें हल्द्वानी में तीन निजी अस्पतालों ने कोविड-19 की जांच रिपोर्ट के बगैर उपचार के लिए लेने से इंकार कर दिया था।
सोबन सिंह मौनी (53) को अचानक तबीयत बिगड़ने पर रविवार रात को पाटी के सरकारी अस्पताल लाया गया। डॉ. राकेश और डॉ. हिमांशु ने हालत में सुधार न होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आभाष सिंह ने बताया कि उन्हें लीवर संबंधी परेशानी थी। परिजनों ने 108 सेवा को कॉल की, लेकिन उन्हें चंपावत जिला अस्पताल तक पहुंचाने की बात कही गई। परिजनों की दलील थी कि पाटी से हल्द्वानी की दूरी 147 किमी है, जबकि चंपावत होते हुए हल्द्वानी जाने के लिए 241 किमी का फासला तय करना पड़ता है।
108 सेवा उपलब्ध न होने से करीब दो घंटे का वक्त बर्बाद हो गया। बाद में परिजनों ने रात 10.45 बजे निजी कार की व्यवस्था कर हल्द्वानी का रुख किया। बेटे रजत मौनी, बहादुर सिंह मेहता, खुशाल सिंह, लाल सिंह, संजय सिंह, राकेश सिंह ने बताया कि हल्द्वानी के अस्पतालों ने कोरोना परीक्षण की रिपोर्ट नहीं होने की दलील देते हुए अस्पताल में भर्ती नहीं किया।
चौथे अस्पताल ले जाते वक्त तोड़ा दम
चौथे अस्पताल ने उनकी हालत को देखते हुए अस्पताल में इंट्री दी, मगर हालत बिगड़ने पर उन्हें बरेली ले जाने की सलाह दी गई। सोमवार शाम बरेली जिले के भोजीपुर अस्पताल ले जाया गया। जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। मंगलवार शाम को शव को पाटी लाया गया। दिवंगत मौनी का बुधवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। पैरा लीगल वॉलंटियर मौनी पूर्व व्यापार मंडल उपाध्यक्ष और रामलीला कमेटी के संरक्षक भी थे।
108 सेवा न मिलने से इस माह पहले भी हो चुकी है दो मौतें
आपात सेवा 108 एंबुलेंस में इस माह इससे पहले भी दो मौतें हो चुकी हैं। चंपावत में 108 सेवा नहीं मिलने से 11 जुलाई के तड़के ड़डा बिष्ट की बुजुर्ग पार्वती देवी की जिला अस्पताल में ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरी मौत जिला अस्पताल से निजी वाहन से 13 जुलाई को हायर सेंटर को ले जाते वक्त नरी देवी की हुई। तब सेवा न मिलने का कारण एंबुलेंस के टायर न होना बताया गया था।
सामान्य रूप से हायर सेंटर रेफर होने पर जिला अस्पताल लाया जाता है, लेकिन मरीज की हालत खराब होने पर 108 एंबुलेंस को सीधे हल्द्वानी सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा जाता है। पाटी क्षेत्र के काफी मरीजों को हल्द्वानी भेजा भी गया है। सोबन सिंह मौनी प्रकरण में एंबुलेंस ने क्यों इंकार किया, इसकी पड़ताल की जाएगी।
-भास्कर शर्मा, जिला समन्वयक, आपात सेवा 108 चंपावत।