Uttarakhand Election 2022: सियासी पंडितों को भी उलझा रही मतदान की मामूली गिरावट, अंदाजा लगाना मुश्किल, किसका पलड़ा भारी
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए मतदान पिछले चुनाव के तकरीबन बराबर ही रहा। भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने गणित के हिसाब से प्रदेश में सरकार बना रहे हैं। रोचक तथ्य यह है कि दोनों ही दल खुद को 40 से अधिक सीटें दे रहे हैं।
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उत्तराखंड की चुनावी सियासत में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति की यह जानने की इच्छा है कि प्रदेश के मतदाता किस दल को सत्ता की बागडोर सौंपने जा रहे है। चाय की दुकान से लेकर सरकारी दफ्तरों और सचिवालय गलियारों तक हर जगह यह सवाल सबकी जुबान पर है।
ऐसी दशा में सबकी निगाहें सियासी पंडितों पर जाकर टिक जाती हैं, लेकिन निर्वाचन आयोग ने मतदान का जो अंतिम आंकड़ा जारी किया है, उसके अनुसार इस बार मत प्रतिशत 2017 के विस चुनाव से मामूली रूप से कम है। राजनीति में यह धारणा रही है कि जब जनता बड़ी तादाद में वोट करने के लिए घरों से बाहर निकलती है तो उसे बदलाव के तौर पर देखा जाता है।
लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ 65.37 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले चुनाव की तुलना में 0.18 प्रतिशत कम है। पिछले चुनाव में 65.55 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस वोट प्रतिशत पर भाजपा 57 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत हासिल करने में कामयाब रही थी। इस बार भी मत प्रतिशत तकरीबन उतना ही है। ऐसे में सियासी पंडित यह अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं कि 53 लाख 42 हजार 462 मतदाताओं ने किसके पक्ष में मतदान किया।
राज्य के चुनावी इतिहास पर दौड़ाएं नजर
इस वोट प्रतिशत में भाजपा ने प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। 2022 के चुनाव में कुछ मतदान में थोड़ी सी ही कमी आई। सियासी जानकार इस थोड़ी कमी के चुनावी निहितार्थ नहीं निकाल पा रहे हैं। प्रदेश में सरकार किस दल की बन रही है, ये बता पाने में सियासी जानकार बेशक मुश्किल महसूस कर रहे हों, लेकिन भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने गणित के हिसाब से प्रदेश में सरकार बना रहे हैं।
रोचक तथ्य यह है कि दोनों ही दल खुद को 40 से अधिक सीटें दे रहे हैं। सियासी जानकार 70 विधानसभा सीटों में एक सीट आम आदमी पार्टी को, दो उत्तराखंड क्रांति दल को, दो बहुजन समाज पार्टी को और तीन निर्दलीयों को दे रहे हैं। इनमें से ज्यादातर सीटों पर भाजपा और कांग्रेस भी अपना दावा कमजोर मान रही है।