उत्तराखंड के अनुपम ने 4500 साल पुरानी राजकुमारी की ममी को दिया 'नया जीवन'
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नैनीताल निवासी अनुपम साह ने क्षतिग्रस्त हो रही 4500 वर्ष पुरानी ममी को नया जीवन दे दिया है।
खास बात यह है कि हैदराबाद के संग्रहालय में रखी लगातार खराब हो रही इस ममी को सुधारने में ब्रिटिश म्यूजियम लंदन सहित ममी के मूल देश मिस्र तक के विशेषज्ञों ने हाथ खडे़ कर दिए थे। बगैर समुचित संसाधनों तथा संबंधित विशेषज्ञों के बावजूद साह ने यह कारनामा कर दिखाया।
हैदराबाद के म्यूजियम में मिश्र के छठे फराओ की पुत्री राजकुमारी नाइशू की ममी रखी हुई है। यह ममी ईसा से 2500 वर्ष पुरानी है। पूर्व में इसे संरक्षित कर मिस्र के पिरामिड में रखा गया था, जहां से हैदराबाद के नजीर नवाब जंग के दामाद मीर महबूब अली खान ने 1920 में इसे मिस्र से एक हजार पौंड में खरीदकर मीर उसमान अली को भेंट कर दिया था जिन्होंने बाद में इसे म्यूजियम को दान कर दिया था।
मिस्र की राजकुमारी नायशू का मात्र 24 वर्ष की आयु में देहांत हो गया था तथा मिस्र की तत्कालीन परंपरा के अनुसार इसकी ममी बनाकर सुरक्षित रख दिया गया था।
मुंबई स्थित प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम से जुडे़ अनुपम साह ने बताया कि बीते वर्ष इस ममी में खराबी आने लगी थी तथा इसके चेहरे की कार्टीलेज सहित कंधे, छाती तथा पैर के संरक्षित किए गए भाग उखड़ने लगे थे।
अनुपम साह ने बताया कि हैदराबाद के आर्कियोलॉजी एवं म्यूजियम विभाग के निदेशक एनआर विसालाची ने इस संबंध में ब्रिटिश म्यूजियम व मिस्र में वार्ता की, लेकिन ममी के सुधार का हल नहीं निकला। यह तथ्य जब उनकी जानकारी में आया तो उन्होंने इसे सुधारने का बीड़ा उठाया।
हालांकि उनके पास उपकरणों व रसायनों सहित इस विषय के जानकारों की टीम नहीं थी। साथ ही ममी के शरीर सहित वस्त्र इतनी जीर्णशीर्ण अवस्था में थे कि उसका एक्सरे, सीटी स्कैन, इंफ्रारेड व अल्ट्रावायलेट तरीकों से टेस्ट किया जाना भी एकाएक संभव न था फिर भी कुछ अन्य वैकल्पिक उपायों द्वारा छह माह के प्रयास के बाद ममी को संरक्षित कर लिया गया। अब इसके लिए एक विशेष नाइट्रोजनीकृत चैंबर बनाया गया है, जिसमें इसके ऑक्सीडेशन से क्षरण की गुंजाइश नहीं है।
अनुपम संरक्षित कर चुके हैं बहुमूल्य कलाकृतियां
अनुपम साह कई देशों में जाकर दुर्लभ व बहुमूल्य कलाकृतियों को संरक्षित कर चुके हैं। उन्हें इटली के राष्ट्रपति से सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘नाइट ऑफ द स्टार ऑफ इटली’ सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
वह अपनी संस्था हिमालयन सोसाइटी फॉर हैरिटेज एंड आर्ट कंजरवेशन के माध्यम से ओडिशा में ऐतिहासिक महत्व के पिलर, बावड़ी व पेंटिंग इत्यादि को संरक्षित कर चुके हैं।
वे ओडिशा सरकार के वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। नैनीताल में भी वह सैकड़ों साल पुराने दस्तावेजों का संरक्षण कर चुके हैं। साथ ही इसका प्रशिक्षण विद्यार्थियों को देते रहते हैं।
700 वर्ष पुरानी ताड़पत्र पर लिखी पांडुलिपियों सहित विष्णु शर्मा द्वारा लिखित पंचतंत्र की मूल प्रतिलिपि तथा अकबर द्वारा इसके फारसी में किए गए अनुवाद की मूल प्रति का संरक्षण भी अनुपम कर चुके हैं।
Published By : Nirmala Suyal