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उत्तराखंड प्रदेश के सभी जिलाधिकारी हाईकोर्ट में तलब

Tue, 07 Mar 2017 09:14 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो / अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 07 Mar 2017 09:14 AM IST
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uttarakhand all dm are summoned in nainital High Court.
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : file photo

नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा संरक्षण को लेकर पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन न होने पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने साफ कहा है कि आदेश का पालन न होने पर जिलाधिकारियों को अवमानना का नोटिस भी जारी किया जा सकता है। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। 

गंगा संरक्षण को लेकर दो दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने प्रदेश और केंद्र सरकार को करीब 26 बिंदुओं का पालन करने का आदेश दिया था। सोमवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता ललित मिगलानी ने कहा कि पूर्व के आदेश का पालन नहीं हो रहा है। इस पर कोर्ट ने खासी नाराजगी जताई।
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कोर्ट का कहना था कि गंगा प्रदूषण के नियंत्रण को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए। पूर्व में कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ही विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए थे।
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याचिकाकर्ता की शिकायत का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को इस मामले में प्रगति रिपोर्ट के साथ 17 मार्च को हाईकोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश जारी किया। यह भी कहा कि अगर दो दिसंबर के आदेश का पालन नहीं होता है तो हाईकोर्ट जिलाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही से भी संकोच नहीं करेगा।  

पूर्व में हाईकोर्ट ये आदेश दिए थे

uttarakhand all dm are summoned in nainital High Court.
कोर्ट - फोटो : Pintrest

-सामाजिक विकास के लिए गंगा का संरक्षण जरूरी, गंगा संरक्षण के लिए विशेष कानून बनाया जाए।
-गंगा के उद्गम से गंगा सागर तक के पांच राज्य तीन माह में परिषद का गठन करें।
-गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए जारी राशि का कैग अपनी ओर से ऑडिट कर राष्ट्रपति के समक्ष पेश करे।
-उत्तराखंड में एक जनवरी से प्लास्टिक कैरी बैग पर पूरी तरह से प्रतिबंधित करें।
-केंद्र नदी संरक्षण क्षेत्र बनाकर निर्माण प्रतिबंधित करे।
-राष्ट्रीय जल संसाधन विकास परिषद गठित किया जाए।
-नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के लिए बनी डीपीआर की धनराशि 266 करोड़ में से उत्तराखंड स्टेट प्रोग्राम मैनेजमेंट ग्रुप को उसका हिस्सा अवमुक्त किया जाए। कोर्ट ने इस राशि से उत्तराखंड पेयजल निगम को एसटीपी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने को कहा था। 
-106 उद्योगों को बंद करें और 180 पर की जाए कार्रवाई।
-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
-गंगा में स्नान के दौरान तेल, साबुन, शैंपू पर पूरीतरह लगाएं रोक।
-गंगा से दो किमी के दायरे में चीनी मिल, पेपर, डिस्टलरी और टैक्सटाइल आदि उद्योग लगाने पर रोक लगाई जाए।
-गंगा किनारे बडे होटल और बडे़ आश्रम स्थापित न होने दिए जाएं।
-नदी से 500 मीटर की दूरी तक मलमूत्र विसर्जन करने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए।

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