पहाड़ पर पाठ पढ़ाएंगे यूपी-दिल्ली के मास्टर
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प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों की कमी से जूझ रही राज्य सरकार ने अब एक नया रास्ता बनाया है। अब रिटायर शिक्षकों की होने जा रही भर्ती में राज्य के शिक्षक होने की शर्त नहीं जोड़ी गई है। ऐसे में अब यूपी-दिल्ली के रिटायर शिक्षक भी आवेदन कर सकते हैं।
हाल ही लोकसेवा आयोग के जरिए जितनी भर्ती की भी गई हैं उससे पहले से चली आ रही कमी ही दूर नहीं हो पाई है। पिछले एक साल के दौरान करीब 15 नए कालेज और 250 से अधिक पद सृजित किए जा चुके हैं।
इस संकट को दूर करने में रिटायर शिक्षक काफी मददगार हो सकते हैं। प्रदेश में शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष है लिहाजा राज्य से ही शारीरिक रूप से फिट शिक्षक उतनी संख्या में मिल पाना बेहद मुश्किल है।
उच्च शिक्षा विभाग ने पहल की
इस अंदेशे को भापते हुए ही शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने यह अभिनव पहल की है। उल्लेखनीय है कि यूपी और दिल्ली में शिक्षकों के रिटायरमेंट की उम्र 60 साल है।
इस फार्मूले से मिलेगा वेतन
रिटायर शिक्षकों को अगर सरकार भर्ती करती है तो उनको वेतन देने का फार्मूला भी अलग होगा। मसलन किसी नियमित शिक्षक को मिलने वाले वेतन में से पेंशन के तौर पर मिलने वाली राशि घटाकर भर्ती रिटायर शिक्षक दी जाएगी।
कहीं के भी रिटायर टीचर आवेदन कर सकते हैं। चूंकि देश भर में इन शिक्षकों की भर्ती लोक सेवा आयोग से होती है इसलिए प्रदेश केबाहर के शिक्षक पर कोई रोक नहीं है।
-मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव-उच्च शिक्षा विभाग
शाम की कक्षाएं चलेंगी
12वीं पास बच्चों के दाखिले के लिए सरकार ने जिन ढांचागत कालेजों में शाम की पाली शुरू करने की अनुमति दी है। शिक्षा विभाग वहां नए पद सृजित नहीं कर रहा है। सुबह की पाली में पढ़ाने वाले शिक्षक शाम की कक्षाएं ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें प्रति लेक्चर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। रिटायर शिक्षक भी इन कक्षाओं में पढ़ा सकते हैं।
शाम की पाली के लिए प्राचार्य या फिर उसकेद्वारा नामित अधिकारी को प्रतिदिन चार सौ रुपए और प्रति माह अधिकतम दस हजार रुपए मिलेंगे। फैकल्टी को प्रति लेक्चर ढाई सौ रुपए मिलेंगे। जबकि कार्यालय लिपिक और प्रयोगशाला सहायक को प्रतिदिन तीन सौ रुपए मिलेंगे लेकिन प्रतिमाह छह हजार रुपए से अधिक नहीं होने चाहिए।
परिचर और अनुसेवक को प्रतिदिन दो सौ रुपए और अधिकतम चार हजार रुपए प्रतिमाह ही मिलेंगे। शाम की कक्षाएं सुचारू चलवाने केलिए जिलाधिकारी को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन की ओर से बनाई गई समिति में जिलाधिकारी उसका अध्यक्ष होगा। जबकि संबंधित महाविद्यालय का प्रचार्य या प्रभारी प्राचार्य उसका सदस्य होगा। संबंधित जिले का वरिष्ठतम प्राचार्य सदस्य सचिव की भूमिका में होगा।
शासन ने स्पष्ट किया कि शाम की कक्षाएं लेने वाली फैकल्टी यूजीसी की निर्धारित अर्हता रखता हो। वर्तमान फैकल्टी निर्धारित न्यूनतम पांच घंटे की कक्षा लेने के बाद अतिरिक्त कक्षाओं में पढ़ाने केलिए इच्छुक हो तो प्राचार्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि वो पांच घंटे का अध्यापन कार्य कर रहा है। शाम की कक्षाएं भी 180 दिन संचालित होंगी।