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Dehradun News: अभी इंटरनेट पर नहीं- यूजेवीएनएल को झटका, नियामक आयोग ने खारिज की पुनर्विचार याचिका

Thu, 30 Oct 2025 07:56 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 07:56 PM IST
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UJVNL suffers setback as regulatory commission rejects review petition
- मनेरी भाली-2 प्रोजेक्ट के आरओई के साथ ब्याज की 80 करोड़ राशि नहीं मिलेगी
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- अन्य मांगों को आयोग ने किया खारिज, केवल एक टाइपिंग गलती मानी



अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) को उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग से झटका लगा है। आयोग ने यूजेवीएनएल की 11 अप्रैल के टैरिफ आदेश पर दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही यूजेवीएनएल को एमबी-2 के आरओई की 80 करोड़ की धनराशि नहीं मिलेगी।
यूजेवीएनएल ने 11 अप्रैल के टैरिफ आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इसमें निगम प्रबंधन ने कहा था कि उन्हें मनेरी भाली-2 परियोजना का ब्याज (कैरिंग कॉस्ट) नहीं दी गई, जबकि पूंजी का लाभ आंशिक रूप से दिया गया। अतिरिक्त पूंजी निवेश, मरम्मत व रखरखाव खर्चों को बिना कारण नकार दिया गया था। एमबी-2 में 85 प्रतिशत से अधिक उपलब्धता होने पर भी इंसेंटिव नहीं दिया। एनर्जी चार्ज की गणना में गलती की गई। व्यासी के लिए लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड की राशि नहीं जोड़ी गई। कुछ टाइपिंग या गणना की त्रुटियां की गईं।
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यूजेवीएनएल ने मांग की थी कि इस पुनर्विचार के माध्यम से टैरिफ आदेश की पुन: समीक्षा की जाए। मामले में आयोग ने पांच अगस्त को सुनवाई की थी। यूजेवीएनएल का दावा था कि आयोग ने एमबी-2 की 920.37 करोड़ का आरओई (पिछले वर्षों के लिए) मांगा था। इस पर भविष्य का ब्याज भी मांगा था। आयोग ने इस राशि को घटाकर 746.10 करोड़ करते हुए इसे तीन किस्तों में देने का निर्णय दिया। यूजेवीएनएल का तर्क था कि इन तीन किस्तों के बीच कुल मिलाकर उन्हें 80.81 करोड़ ब्याज भी दिया जाए।
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इस पर यूपीसीएल ने विरोध जताया था। आयोग ने भी ये माना कि यूजेवीएनएल ने 804.41 करोड़ रुपये का दावा किया था। कुछ तकनीकी तथ्य जैसे एनएपीएएफ और वास्तविक उत्पादन का प्रभाव नहीं जोड़ा। इसलिए टैरिफ आदेश में 746.18 करोड़ की राशि तय की। यूजेवीएनएल ने खुद सात फरवरी 2025 के पत्र में बिना ब्याज के इस राशि की मांग की थी। ब्याज भविष्य के लिए मांगा था। आयोग के विवेक पर निर्भर करता है कि वह ब्याज दे या नहीं। आयोग ने उपभोक्ता और कंपनी के हितों को देखते हुए ब्याज नहीं दिया था। लिहाजा, आयोग की पुनर्विचार याचिका खारिज की गई। केवल इसमें एक टाइपिंग गलती के सुधार को मंजूर किया गया।
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