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दुनिया के सबसे ऊंचे शिवालय भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद, छह माह तक यहां होगी पूजा

Fri, 27 Oct 2017 07:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, तुंगनाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, तुंगनाथ Updated Fri, 27 Oct 2017 07:12 PM IST
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tungnath dham door closed for six months in 2017

तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के छह माह के लिए बंद कर दिए गए। इस मौके पर करीब दो सौ श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर आशीष प्राप्त किया। बाबा तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ के लिए प्रस्थान करते हुए पहले पड़ाव चोपता पहुंच गई है।

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30 अक्तूबर को तृतीय केदार शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर में विराजमान होंगे। भगवान की अगले छह माह तक मार्कंडेय मंदिर में ही पूजा अर्चना होगी। भगवान तुंगनाथ के कपाट शुक्रवार सुबह 10.30 बजे बंद कर दिए गए।
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प्रात: 7 बजे से मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। पुजारी मुकेश मैठाणी व चंद्रबल्लभ मैठाणी ने मुख्य मंदिर, मां पार्वती, नंदी, पंचकेदार सहित भूतनाथ मंदिर, भैरवनाथ, वन देवियों, रुद्रनाथ और अन्य देवताओं की पूजा कर उनका आह्वान किया।

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tungnath dham door closed for six months in 2017

शुभ लग्न में मठापति राम प्रसाद मैठाणी ने गर्भगृह में प्रवेश किया। इस अवसर पर भगवान आशुतोष के स्वयंभू लिंग की पुष्प, अक्षत, घी, दूध, मक्खन, शहद और पंच मेवा सहित फलों से पूजा की गई।

भगवान की भोग मूर्ति को चल विग्रह उत्सव डोली में रख मंदिर परिसर में पार्वती मंदिर के सामने रखा गया। मुख्य मंदिर और भूतनाथ मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद अखोड़ी और हुड्डू गांव के हक-हकूकधारी जमाणियों (चल विग्रह डोली ले जाने वाले) के सहयोग से जैसे ही भगवान तुंगनाथ ने अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मार्कंडेय मंदिर मक्कूमठ के लिए प्रस्थान किया, वैसे ही धाम में मौजूद थौर भंडारी, मंदिर समिति के प्रबंध प्रकाश पुरोहित, डोली प्रभारी वाईएस पुष्पवाण, प्रकाश मैठाणी, अतुल मैठाणी, जयकृष्ण मैठाणी, केएन मैठाणी आदि की मौजूदगी में धाम के कपाट विधि-विधान से प्रात: साढ़े दस बजे बंद कर दिए गए। इस दौरान पूरा क्षेत्र तृतीय केदार के जयकारों से गूंज उठा।

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