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सचिवालय की फाइलों को लेकर त्रिवेंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला

Mon, 20 Mar 2017 08:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 20 Mar 2017 08:15 PM IST
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trivendra government's rule for uttarakhand
- फोटो : demo pic

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सरकार बनने के बाद पहले ही द‌िन त्रिवेद्र सरकार के मंत्रियों ने काम शुरु कर द‌ि‌या है। पहले ही द‌िन कैब‌िनेट मंत्री प्रकाश पंत ने सच‌िवालय की फाइलों को लेकर यह फैसला सुना द‌िया।

बीजेपी के राज में इस बार संसदीय सचिवों को फाइलों से दूर रखा जाएगा। हरीश रावत सरकार में संबंधित मंत्रालय की फाइल संसदीय सचिवों से होकर गुजरती थी। बीजेपी ने इस मामले में कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी। अब बीजेपी सरकार में संसदीय सचिवों के संबंध में इस व्यवस्था को लागू नहीं किया जाएगा। 
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विधायकों के एडजस्टमेंट के लिए बीजेपी सरकार के जमाने में ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति शुरू की गई थी। सीएम रहते हुए डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने सबसे पहले इस व्यवस्था को लागू किया था। इस सिस्टम को बाद में विजय बहुगुणा और हरीश रावत दोनों सरकारों ने आगे बढ़ाया। हरीश रावत सरकार तो एक कदम और आगे बढ़ गई थी। 
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इस सरकार में संसदीय सचिवों को उनसे संबंधित मंत्रालयों की फाइलों के अवलोकन का अधिकार मिला। मंत्रालय की फाइल बकायदा संसदीय सचिवों से होकर गुजरने लगीं। इस मामले को बीजेपी हाईकोर्ट तक ले गई थी।

इन्होंने ल‌िया फैसला

trivendra government's rule for uttarakhand

त्रिवेंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने शुरू से लेकर आखिर तक इस मामले में लड़ाई लड़ी। नई सरकार में नए सिरे से संसदीय सचिवों की नियुक्ति की जानी है, हालांकि ये नियुक्ति कब की जाएगी, इसके संकेत सरकार ने नहीं दिए हैं।

इन स्थितियों के बीच, कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत ने सोमवार को कहा कि बीजेपी संसदीय सचिवों की नियुक्ति के विरोध में नहीं रही है। विरोध इस बात पर था कि संसदीय सचिवों को क्यों असंवैधानिक तरीके से फाइलें देखने का अधिकार दिया गया है।

गोपनीय फाइल वो ही देख सकता है, जिसने पद और गोपनीयता की शपथ ली हो। संसदीय सचिवों पर ये बात लागू नहीं होती, इसलिए हरीश रावत सरकार के जमाने में जो कुछ किया गया, वो पूरी तरह गलत था। पंत ने कहा कि बीजेपी सरकार में संसदीय सचिवों के संबंध में ये व्यवस्था नहीं रहेगी। वो ही व्यवस्था लागू की जाएगी, जो संवैधानिक है।

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