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फिटनेस मामले को लेकर मुख हो रहे ट्रांसपोर्टर, कहा नहीं होने देंगे शोषण
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कमर्शियल वाहनों की फिटनेस की कार्रवाई विकासनगर से डोईवाला स्थानांतरित करने के सरकार के निर्णय को लेकर ट्रांसपोर्टरों में भारी नाराजगी है। इसको लेकर ट्रांसपोर्टर और वाहन यूनियनों के नेता गोलबंद हो रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला शोषण वाला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूनियनों के पदाधिकारियों ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री को तुरंत संज्ञान लेकर फैसले को वापस लेना चाहिए।
देहरादून व विकासनगर में की जाने वाली कमर्शियल वाहनों की फिटनेस की जांच को डोईवाला में कराए जाने की कार्रवाई शासन स्तर से शुरू की गई है। कार्रवाई को लेकर ट्रांसपोर्टरों में भारी नाराजगी है। देहरादून स्टेस कैरेज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकुमार सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए फैसले को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि डोईवाला में फिटनेस कराने से ट्रांसपोर्टरों पर लगभग पांच हजार रुपये का अलग से खर्च पड़ेगा। सरकार के इस निर्णय से ट्रांसपोर्टर खुश नहीं हैं। डाकपत्थर-देहरादून प्राइवेट बस यूनियन के अध्यक्ष सौरभ शर्मा, कालसी-देहरादून प्राइवेट बस यूनियन के अध्यक्ष महेंद्र पाल ने कहा कि इस मामले को लेकर जनपद की सभी बस यूनियनों व अन्य ट्रांसपोर्ट यूनियन, टैक्सी यूनियनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके नए फैसले पर विचार किया जाएगा। इसके पश्चात सबकी सहमति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
जौनसार बावर यूटिलिटी सार्वजनिक हल्का वाहन संघ के उपाध्यक्ष व चकराता टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष रणवीर सिंह राणा ने कहा कि फिटनेस की प्रक्रिया से गुजरने के लिए वाहनों को डोईवाला जाना पड़ता है तो यह गंभीर व कठिन समस्या होगी। जो वाहन स्वामियों के लिए आर्थिक रूप से व मानवीय रूप से भी नुकसान दायक होगी। यूनियन पदाधिकारी इस मामले में शीघ्र ही परिवहन मंत्री से मिलकर निर्णय को वापस लेने की मांग करेंगे।
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बिना परमिट वाहन कैसे पहुंचेंगे डोईवाला
ट्रांसपोर्टर व वाहनों की यूनियनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनपद देहरादून के प्रत्येक गांव-शहर से डोईवाला जाने के लिए कम से कम 2500 रुपये डीजल, एक हजार रुपये टोल व एक हजार रुपये वाहन के ड्राइवर-कंडक्टर आदि को अतिरिक्त खर्च प्रदान करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन वाहनों के पास डोईवाला रूट का परमिट नहीं होगा उनके डोईवाला आने-जाने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने की जिम्मेदार किसकी होगी। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सरकार को वाहन स्वामियों की परेशानी को बढ़ाने के बजाए उन्हें राहत देने की रणनीति बनाकर काम करना चाहिए।
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देहरादून व विकासनगर में की जाने वाली कमर्शियल वाहनों की फिटनेस की जांच को डोईवाला में कराए जाने की कार्रवाई शासन स्तर से शुरू की गई है। कार्रवाई को लेकर ट्रांसपोर्टरों में भारी नाराजगी है। देहरादून स्टेस कैरेज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकुमार सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए फैसले को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि डोईवाला में फिटनेस कराने से ट्रांसपोर्टरों पर लगभग पांच हजार रुपये का अलग से खर्च पड़ेगा। सरकार के इस निर्णय से ट्रांसपोर्टर खुश नहीं हैं। डाकपत्थर-देहरादून प्राइवेट बस यूनियन के अध्यक्ष सौरभ शर्मा, कालसी-देहरादून प्राइवेट बस यूनियन के अध्यक्ष महेंद्र पाल ने कहा कि इस मामले को लेकर जनपद की सभी बस यूनियनों व अन्य ट्रांसपोर्ट यूनियन, टैक्सी यूनियनों के पदाधिकारियों के साथ बैठक करके नए फैसले पर विचार किया जाएगा। इसके पश्चात सबकी सहमति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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जौनसार बावर यूटिलिटी सार्वजनिक हल्का वाहन संघ के उपाध्यक्ष व चकराता टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष रणवीर सिंह राणा ने कहा कि फिटनेस की प्रक्रिया से गुजरने के लिए वाहनों को डोईवाला जाना पड़ता है तो यह गंभीर व कठिन समस्या होगी। जो वाहन स्वामियों के लिए आर्थिक रूप से व मानवीय रूप से भी नुकसान दायक होगी। यूनियन पदाधिकारी इस मामले में शीघ्र ही परिवहन मंत्री से मिलकर निर्णय को वापस लेने की मांग करेंगे।
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ट्रांसपोर्टर व वाहनों की यूनियनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनपद देहरादून के प्रत्येक गांव-शहर से डोईवाला जाने के लिए कम से कम 2500 रुपये डीजल, एक हजार रुपये टोल व एक हजार रुपये वाहन के ड्राइवर-कंडक्टर आदि को अतिरिक्त खर्च प्रदान करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिन वाहनों के पास डोईवाला रूट का परमिट नहीं होगा उनके डोईवाला आने-जाने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने की जिम्मेदार किसकी होगी। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सरकार को वाहन स्वामियों की परेशानी को बढ़ाने के बजाए उन्हें राहत देने की रणनीति बनाकर काम करना चाहिए।