इस जिले में डीएम की कुर्सी पर मंडराता रहता है खतरा
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आपदा प्रभावित उत्तरकाशी में जिलाधिकारी की कुर्सी भी हिलती रही है। बृहस्पतिवार को एक बार फिर यहां के जिलाधिकारी का तबादला कर दिया गया। इस जिले में एक ही साल में तीन जिलाधिकारी बदले जा चुके हैं।
डॉ. आर राजेश कुमार ने करीब एक साल तीन महीने का कार्यकाल पूरा कर 8 जुलाई 2013 में कुर्सी छोड़ी थी। उसके बाद जिलाधिकारी के तौर पर पंकज पांडेय को भेजा गया जिन्हें पांच महीने में स्थानांतरित कर दूसरा जिला दे दिया गया।
श्रीधर बाबू को 3 दिसम्बर 2013 को टिहरी का जिलाधिकारी बनाकर भेजा गया लेकिन करीब सात महीने में पूरे होते ही उन्हें भी हटा दिया गया।
जिलाधिकारी पद पर इतनी जल्दी तबादला होने से जिले की तमाम योजनाएं प्रभावित होती हैं। जब तक कोई अधिकारी जिले को समझता है तब तक उसे हटा दिया जा रहा है।
14 साल में मिले 14 जिलाधिकारी
इतना ही नहीं अलग राज्य बने अभी 14 साल पूरे नहीं हुए, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं की मार से त्रस्त सीमांत जनपद उत्तरकाशी में अब तक 14 जिलाधिकारी बदले जा चुके हैं।
इनमें से सिर्फ दो जिलाधिकारियों का कार्यकाल ही दो साल से कुछ अधिक रहा, जबकि 11 डीएम तो एक साल भी नहीं टिक पाए। स्थानीय लोग कम समय में ही डीएम के तबादलों को जिले के विकास की लिहाज से गलत मान रहे हैं।
नौ नवंबर 2000 में अलग राज्य बनने के बाद से अब तक जिले में 14 डीएम बदले जा चुके हैं। अब सी रविशंकर 15वें डीएम के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन वाले दौर में यहां डीएम रहे केके पंत ने जिले में सबसे अधिक समय गुजारा, जबकि उनके तुरंत बाद यहां आए राजीव चंद्र का कार्यकाल सबसे कम महज 52 दिन रहा। वर्ष 2010 से निरंतर प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे जिले में इन चार वर्षों में छह डीएम बदले जा चुके हैं।