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एआरटीओ से ऑटोवाले ने बोला ‘मेरी मर्जी’

Sat, 02 Aug 2014 10:45 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 02 Aug 2014 10:45 AM IST
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traffic rules and auto driver

नियम कायदे परखने के लिए धरातल पर उतर रहे अफसरों को जमीनी हकीकत पसीने छुड़ा रही है। गुरुवार को एसपी ट्रैफिक जहां सिटी बसों की अराजकता से जूझे, वहीं शुक्रवार को एआरटीओ का पाला ऑटोवाले से पड़ा।

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ऑटो मालिक को नोटिस
जिलाधिकारी कार्यालय से आवास जा रहे एआरटीओ से ऑटोवाले ने पूरे 100 रुपये वसूले। इतने किराये का तर्क पूछा तो ऑटोवाला ‘मेरी मर्जी’ कहकर चलता बना। परिचय छुपाते हुए एआरटीओ ने ऑटो का नंबर नोट कर लिया। फिर दफ्तर पहुंचकर ऑटो मालिक को नोटिस जारी कर दिया। एआरटीओ ने मनमाफिक किराये के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए।
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सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) संदीप सैनी शुक्रवार को विभागीय काम से जिलाधिकारी कार्यालय गए। वहां से सचिवालय नैनी चौक के पास स्थित अपने घर लौटना था। पूरे रास्ते की दूरी करीब दो किमी है।
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सरकारी वाहन न होने से उन्होंने डीएम ऑफिस के बाहर से ऑटो पकड़ा। ऑटो संख्या यूके 07 टीए 2997 ने उन्हें आवास के बाहर छोड़ा। किराया पूछने पर चालक ने सौ रुपये बताए। एआरटीओ ने तय रेट से ज्यादा किराये की वजह पूछी तो चालक बोला कि रेट लिस्ट पुरानी है।

हम उससे नहीं चलते। इस दौरान चालक एआरटीओ को पहचान नहीं सका। विरोध किए बगैर सैनी ने उसे सौ रुपये दे दिए। इसके बाद दफ्तर पहुंचे एआरटीओ ने संबंधित आटो मालिक के खिलाफ नोटिस भेज दिया।

कर्मचारियों को निर्देश दिए कि तय रेट से ज्यादा वसूली करने वालों पर सख्त अभियान चलाएं। सैनी ने कहा कि ऑटो चालकों को नियमों के अलावा तय रेट पर ही सवारी पहुंचानी होगी। दिक्कत पर यात्री आरटीओ में शिकायत करें, निश्चित कार्रवाई होगी।

यह है नियम

नियमानुसार आटो वालों को हर किमी के लिए आठ रुपये किराया तय है। मगर शहर में आटो संचालक मनमर्जी किराया वसूलते हैं। रात के वक्त लूट और बढ़ जाती है। देर रात आईएसबीटी आने वाली बसों की सवारियों से यह 400 रुपये तक वसूलते हैं।

ऑटो बुलाकर निरीक्षण पर जाते अफसर

सरकारी वाहन न मिलने से संभागीय परिवहन विभाग अफसरों को छापेमारी पर जाने के लिए ऑटो बुलाना पड़ता है। वाहन के लिए कई बार शासन को लिखा गया, लेकिन वाहन आज तक नहीं मिला पाया है।


राज्य के हर संभाग में सहायक संभागीय अधिकारी (प्रशासन) के पास अपना वाहन नहीं है। जबकि इन्हें प्रवर्तन दल के इतर कई जगह निरीक्षण पर जाना होता है। ऑटो पर जाने के चलते कई बार मुखबिरी के चलते लोगों को पहले पता चल जाता है।

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-manmeetr@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 8392946711 पर संपर्क कर सकते हैं।)

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