कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघ ने वन कर्मचारी को बनाया निवाला, जंगल में मिला क्षत-विक्षत शव
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के प्लेन रेंज के तातापानी क्षेत्र के जंगल में गश्त कर रहे दैनिक वन श्रमिक (वॉचर) को बाघ ने निवाला बना दिया। घटना से वन विभाग में हड़कंप मचा है।
घटना सोमवार दिन की है। बाघ वन कर्मी को खींचकर घटनास्थल से करीब आधा किमी दूर पहाड़ी पर ले गया, जहां उसने एक पैर खा लिया। सूचना मिलते ही रेंज अधिकारी की अगुवाई में वन कर्मियों ने पूरे इलाके में कांबिंग की। देर शाम को वन कर्मी का शव बरामद कर लिया गया है।
कालागढ़ टाइगर रिजर्व के प्लेन रेंज के डांडापानी बीट में फारेस्ट गार्ड संदीप आर्य की अगुवाई में दैनिक श्रमिक गश्त पर थे। करीब पांच वन कर्मियों की टीम घने जंगल के बीच पैदल रास्ते से जा रहे थे।
जैसे ही वन कर्मियों की टीम कनसूर कक्ष संख्या-12 से गुजर रही थी। वहां पहले से घात लगाकर बैठा बाघ (टाइगर) दैनिक वन कर्मी सोहन सिंह (23) पुत्र मेहरबान सिंह निवासी तिमलपाणी, गजवाड़ (सेंधीखाल) को उठा ले गया।
बाघ के हमले और एक कर्मी को उठा ले जाने से वन कर्मियों में हड़कंप मच गया। उन्होंने पहले शोर मचाया और इसके बाद फाॅरेस्ट गार्ड ने अपनी बंदूक से दो फायर किए, लेकिन वह सोहन सिंह को बाघ से नहीं छुड़ा सके। देखते ही देखते बाघ सोहन सिंह को मुंह में दबाकर घने जंगल में ले गया।
फॉरेस्ट गार्ड संदीप आर्य ने यह जानकारी रेंज अधिकारी धर्मानंद ध्यानी को दी। उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचना दी। रेंजर ध्यानी की अगुवाई में वन कर्मियों की टीम उसकी तलाश में निकली। देर शाम को उसका शव आधा किमी घने जंगल से बरामद कर लिया गया। रेंज अधिकारी धर्मानंद ध्यानी ने बताया कि फाॅरेस्ट वॉचर सोहन सिंह 2016 से दैनिक श्रमिक के रूप में काम कर रहा था।
पिथौरागढ़ के पांडेय गांव में दिनदहाड़े आया तेंदुआ, दहशत
पिथौरागढ़ के पांडेय गांव में दिनदहाड़े तेंदुआ आ धमका। वह एक घर के स्टोर में घुसा है। इससे क्षेत्र में दहशत फैली है। वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए ट्रैंकुलाइजर गन और पिंजरे के साथ मौके पर मुस्तैद हो गई है।
पांडेय गांव से पाट्टा जाने वाले रास्ते पर नाले के पार मुकुल वर्मा का मकान है। उन्होंने सीढ़ी के नीचे छोटा सा स्टोर बनाया है। सोमवार दोपहर मुकुल की मां लहसुन डालने के लिए स्टोर के पास गईं तो उन्होंने वहां बिल्लीनुमा जानवर बैठा दिखाई दिया।
उन्होंने अपने किराएदार को इसकी जानकारी दी। किराएदार बाहर आए और उन्होंने स्टोर में हाथ डालकर जानवर की पूंछ खींचनी चाही तो उनकी चीख निकल गई। अंदर तेंदुआ गुर्रा रहा था। अपराह्न ढाई से तीन बजे के बीच इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। इस पर वन रेंजर दिनेश चंद्र जोशी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
दिनदहाड़े तेंदुआ आने की खबर फैली तो मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट गई। रेंजर जोशी ने बताया कि स्टोर के ऊपर लकड़ी के तख्ते डाले गए हैं। इससे तेंदुआ स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा है। उसके गुर्राने की आवाज ही सुनाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि अचानक तेंदुआ बाहर निकल किसी पर हमला नहीं करे इसके चलते किसी को भी मौके पर नहीं आने दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि टीम के पास ट्रैंकुलाइजर गन तो है, लेकिन तेंदुआ दिखाई नहीं दे रहा है। वन विभाग की टीम रात होने का इंतजार कर रही है। टीम में वन दरोगा हेम चंद्र जोशी, मनोज सिंह, प्रह्लाद सिंह, कैलाश चंद्र ग्वासीकोटी, तारा सिंह, प्रताप सिंह, जगदीश सिंह आदि कर्मी शामिल हैं।