फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   tibati medical treatment.

यह किताब पढ़ने से दूर हो जाएंगी सभी बीमारी!

Sun, 12 Apr 2015 05:43 PM IST
रवींद्र पांडे रवि/ अमर उजाला, नैनीताल
रवींद्र पांडे रवि/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Sun, 12 Apr 2015 05:43 PM IST
विज्ञापन
tibati medical treatment.
50 हजार साल पहले तिब्बती पूर्वजों की खोज आज भी समुदाय व अन्य को निरोगी रखने का सफल माध्यम बन रही है।
विज्ञापन


समुदाय के लोग एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद से इतर पारंपरिक पद्धति से अपना उपचार कराना ज्यादा बेहतर समझते हैं। हजारों वर्ष पूर्व उनके पूर्वजों द्वारा लिखित चिकित्सा ग्रंथ सोवा-रिपा में हर बीमारी की संजीवनी छिपी हुई है।

इसमें पौधे की जड़, तने और पत्तों के अर्क से दवा बनाई जाती है। जो किसी भी प्रकार से हानिकारक नहीं होती और असाध्य बीमारियों को जड़ समूल नष्ट करती है। क्यू-सी तंत्र में दवा के बनाए जाने व इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया है।
विज्ञापन


चकराता (देहरादून) से आए समुदाय के चिकित्सक थुप्तेन नामदोल ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के गंगचेन धर्मशाला के मेन-टीसी-खांग तिब्बत मेडिकल एस्ट्रोलॉजिकल इंस्टीट्यूट आफ एचएच द दलाईलामा में इसी चिकित्सा ग्रंथ के आधार पर कोर्स तैयार किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अमेरिका, यूरोप समेत भारत देश में 54 शाखा

tibati medical treatment.

जहां 5 वर्ष के डिग्री कोर्स के अलावा एक वर्ष के प्रयोगात्मक परीक्षण के बाद डॉक्टरों को समुदाय और अन्य की चिकित्सा सेवा के लिए भेज दिया जाता है डॉक्टर भी व्यवसायिक न होकर सेवाभाव से कार्य करता है।

अमेरिका, यूरोप समेत भारत देश में 54 शाखा कार्यशील हैं। इसमें 150 से अधिक चिकित्सक और अन्य स्टाफ मौजूद है। चिकित्सकों की ओर से समुदाय के आग्रह पर शिविर भी लगाए जाते हैं। केंद्र सरकार की ओर से भी समुदाय की चिकित्सा पद्धति व संस्था को मान्यता दी गई है।

डॉ. थुप्तेन ने बताया कि वनस्पति की जड़, तने और पत्ते के अर्क से दवा बनाई जाती है। अधिकांश वनस्पति हिमाचल में मिल जाती है, जबकि कुछ तिब्बत और लद्दाख से आती है।

हर बीमारी का है इलाज
डॉ. थुप्तेन ने बताया कि इसमें डायबिटीज, मिर्गी, रक्तचाप, हैपेटाइटिस-बी, पथरी, पेट की बीमारी, गठिया-बात, माइग्रेन आदि सभी बीमारियों का इलाज है। इसमें रोग का जड़ समूल नष्ट होता है, हालांकि उपचार में समय अधिक लगता है।

तीन दर्जन से अधिक का हुआ उपचार
समुदाय की पहल पर शनिवार को गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा में आयोजित शिविर में तीन दर्जन मरीजों का उपचार किया गया। सुबह 10 बजे से लगा शिविर शाम पांच बजे तक चला।

शिविर में डॉ. थुप्तेन नामदोल, सोनम छोम्पाल ने लोगों का इलाज किया। समुदाय के पीजी सिथर ने बताया कि महीने के प्रत्येक द्वितीय शनिवार को शिविर लगाया जाएगा। मरीज बढ़ने पर दिनों में वृद्धि की जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed