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उत्तराखंडः मनरेगा घोटाले में जेई, वीडीओ और पूर्व प्रधान गिरफ्तार

Tue, 21 Jun 2016 09:13 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो / अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 21 Jun 2016 09:13 PM IST
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three arrested in mnrega scam
- फोटो : demo pic

विण विकासखंड के स्याला गांव में वर्ष 2008 से 2013 के बीच हुए लाखों रुपये के मनरेगा घोटाले में मंगलवार को राजस्व पुलिस ने ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ) भूपेंद्र सिंह बिष्ट, मनरेगा के जूनियर इंजीनियर महेंद्र मुंडेला और तत्कालीन ग्राम प्रधान देवराज सिंह को गिरफ्तार कर लिया।

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इस मामले में मिनी बैंक सचिव उमेद सिंह की पहले ही गिरफ्तारी हो गई थी। राजस्व पुलिस के अनुसार घोटाले का मुख्य सूत्रधार पकड़ से बाहर है। इस मामले में अभी और गिरफ्तारियां होंगी। स्याला गांव में मनरेगा की मद से मिली राशि में 50 से 60 लाख रुपये तक का घोटाला हुआ था।
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घोटाले की जानकारी मिलते ही डीएम ने वर्ष 2015 में इस मामले में विण के खंड विकास अधिकारी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए और जांच के लिए एसडीएम अनुराग आर्य की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। एसडीएम और जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरि ने कई बार जांच के लिए स्याला गांव का दौरा किया था। इस मामले में विभागीय जांच भी हुई थी।
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दो ग्राम विकास अधिकारी और एक जेई निलंबित हुए थे। मामले की विवेचना राजस्व उपनिरीक्षक यशवंत थापा ने की। जांच का काम लगभग पूरा होने के बाद राजस्व पुलिस की टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देनी शुरू की। चार दिन पहले राजस्व टीम ने जब स्याला गांव में दबिश दी तो कोई भी पकड़ में नहीं आया। मंगलवार सुबह से फिर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान चलाया गया।

तीनों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार कर लिया गया। टीम का नेतृत्व नायब तहसीलदार उमेद राम ने किया। टीम में राजस्व उपनिरीक्षक प्रकाश कापड़ी, भरत मेहता, शंकर कापड़ी, जीवन पुनेठा, अनुसेवक ललित कलौनी शामिल थे। राजस्व विभाग ने तीनों के खिलाफ धारा 420, 465, 467, 468, 471, 406, 409 और 120 बी में मुकदमा दर्ज किया है। आरोप है कि पहले इन लोगों ने गलत तरीके से विण विकासखंड कार्यालय से मनरेगा की मद में बड़ी धनराशि हासिल की।


बाद में फर्जी जॉबकार्ड, फर्जी मस्टरोल के माध्यम से धन की हेराफेरी कर दी। इन लोगों ने मिलकर लोगों की जानकारी के बिना उनके बैंक खाते खोले, उनमें मनरेगा की मद का पैसा डाला, फिर सारी धनराशि की खुद निकासी कर ली। इस्टीमेट को भी एक समान बना दिया गया। राजस्व विभाग की जांच में पाया गया कि षड्यंत्र के तहत सरकारी धन को हड़पने का काम किया गया था।

Published By : Nirmala Suyal

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