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तुष्टीकरण का चश्मा पहन शासन करने वाले आजादी के बाद के कामों को भूल गए : सीएम
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि तुष्टीकरण का चश्मा पहनकर जिन्होंने दशकों तक शासन किया वे आजादी के बाद के कामों को भूल गए। संविधान निर्माताओं के संकल्प को सच करने का काम हमारी सरकार ने किया है। यूसीसी भी उन्हीं कामों में से एक है। यूसीसी महिला सशक्तीकरण के नए युग की शुरुआत है। आज मुस्लिम बहनें जब हमसे मिलती हैं तो वे इसके लिए धन्यवाद करती हैं। यूसीसी ने उन्हें समाज की कुरीतियों से बाहर निकालने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने ये बातें मंगलवार को पहले यूसीसी दिवस के कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने यूसीसी में योगदान देने वाले अधिकारियों और रजिस्ट्रेशन में सराहनीय कार्य करने वालों का सम्मान भी किया।
हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में प्रथम समान नागरिक संहिता दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इसी दिन समान नागरिक संहिता लागू हुई, जिसने समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित की। सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है। इसके लिए उन्होंने गीता में श्रीकृष्ण के श्लोक समोहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योस्ति न प्रिय को भी बताया। इसका अर्थ है कि मैं सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता हूं, न किसी का शत्रु हूं और न ही किसी के प्रति पक्षपात करता हूं। सनातन संस्कृति की यही महानता है। उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने का संकल्प लिया। इसके लिए भाजपा को अपार समर्थन और आशीर्वाद मिला। कहा कि यह समानता से समरसता का प्रयास है। यूसीसी किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है। इससे समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर नागरिकों में समानता से समरसता स्थापित की है।
Iपहले उड़ाते थे मजाक, लागू होने के बाद कुप्रचार भी किया
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी की जब बात की थी तब कुछ लोगों ने मजाक भी उड़ाया था। पहली बार जब सत्ता संभाली तब बहुत कम समय के लिए था। चुनाव आने वाले थे तो लोगों ने यहां तक कहा कि यहां दोबारा आने की परंपरा नहीं है। तुम नहीं कर पाओगे। हालांकि, प्रदेश की जनता ने भरोसा जताया और हम फिर से सत्ता में आ गए। इसके बाद सबसे पहला काम यही किया और अपना संकल्प पूरा किया। जब यूसीसी लागू हो गई तो इसके बारे में इन्हीं लोगों ने कुप्रचार भी किया। इसे कई मंचों पर गलत बताया गया। वर्ग विशेष के खिलाफ बताया गया लेकिन अब लोग इसके लिए धन्यवाद करते हैं।
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Iप्रदेश को अतिक्रमण से बचाने का आह्वान हेट स्पीच है तो फिर बोलूंगा
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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका की एक एनजीओ ने उन्हें हेट स्पीच देने वाले लोगों की फेहरिस्त में एक नंबर पर रखा है। बताया गया था कि उन्होंने लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण पर कई बयान दिए हैं। ये हेट स्पीच के दायरे में आते हैं। मुख्यमंत्री ने हंसकर कहा कि अगर अपने प्रदेश को अतिक्रमण से बचाने के लिए आह्वान करना और बोलना हेट स्पीच है तो वे इस काम को फिर करेंगे। धर्मांतरण पर बोलना हेट स्पीच है तो फिर ये ठीक ही है।
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हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में प्रथम समान नागरिक संहिता दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा। इसी दिन समान नागरिक संहिता लागू हुई, जिसने समाज में सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना सुनिश्चित की। सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और समानता की संवाहक रही है। इसके लिए उन्होंने गीता में श्रीकृष्ण के श्लोक समोहम सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योस्ति न प्रिय को भी बताया। इसका अर्थ है कि मैं सभी प्राणियों के प्रति समान भाव रखता हूं, न किसी का शत्रु हूं और न ही किसी के प्रति पक्षपात करता हूं। सनातन संस्कृति की यही महानता है। उन्होंने आगे कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर सहित सभी संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता को संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने का संकल्प लिया। इसके लिए भाजपा को अपार समर्थन और आशीर्वाद मिला। कहा कि यह समानता से समरसता का प्रयास है। यूसीसी किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है। इससे समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर नागरिकों में समानता से समरसता स्थापित की है।
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Iपहले उड़ाते थे मजाक, लागू होने के बाद कुप्रचार भी किया
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी की जब बात की थी तब कुछ लोगों ने मजाक भी उड़ाया था। पहली बार जब सत्ता संभाली तब बहुत कम समय के लिए था। चुनाव आने वाले थे तो लोगों ने यहां तक कहा कि यहां दोबारा आने की परंपरा नहीं है। तुम नहीं कर पाओगे। हालांकि, प्रदेश की जनता ने भरोसा जताया और हम फिर से सत्ता में आ गए। इसके बाद सबसे पहला काम यही किया और अपना संकल्प पूरा किया। जब यूसीसी लागू हो गई तो इसके बारे में इन्हीं लोगों ने कुप्रचार भी किया। इसे कई मंचों पर गलत बताया गया। वर्ग विशेष के खिलाफ बताया गया लेकिन अब लोग इसके लिए धन्यवाद करते हैं।
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Iप्रदेश को अतिक्रमण से बचाने का आह्वान हेट स्पीच है तो फिर बोलूंगा
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कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका की एक एनजीओ ने उन्हें हेट स्पीच देने वाले लोगों की फेहरिस्त में एक नंबर पर रखा है। बताया गया था कि उन्होंने लव जिहाद, लैंड जिहाद और धर्मांतरण पर कई बयान दिए हैं। ये हेट स्पीच के दायरे में आते हैं। मुख्यमंत्री ने हंसकर कहा कि अगर अपने प्रदेश को अतिक्रमण से बचाने के लिए आह्वान करना और बोलना हेट स्पीच है तो वे इस काम को फिर करेंगे। धर्मांतरण पर बोलना हेट स्पीच है तो फिर ये ठीक ही है।