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रक्षाबंधन : दोपहर बाद भाईयों की कलाई पर सजेगी राखियां
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I19 अगस्त को दोपहर 1.30 बजे तक रहेगा भद्राकाल, 7.37 घंटे तक रहेगा शुभ मुहूर्तI
भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पर इस बार भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनों को दोपहर तक का इंतजार करना होगा। दरअसल, रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया रहेगा। इसलिए दोपहर डेढ़ बजे तक भाइयों की कलाई पर राखी नहीं सज सकेगी। राखी बांधने के लिए पूरे दिन में करीब 7:37 घंटे का शुभ मुहूर्त रहेगा।
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि इस साल पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त को सुबह 3:04 बजे शुरू होकर रात 11:55 बजे समाप्त होगी। शास्त्र और मुहूर्त में भद्राकाल को अशुभ माना गया है। इसलिए भद्राकाल में भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधनी चाहिए। भद्राकाल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत के साथ ही शुरू हो जाएगा और दोपहर 1:30 बजे समाप्त होगा। इसलिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:30 से रात 9:07 तक रहेगा। कुल मिलाकर शुभ मुहूर्त 7 घंटे 37 मिनट का होगा।
Iभद्रा में क्यों नहीं होते शुभ कार्यI
आचार्य बताते हैं कि भद्राकाल के समय को अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य के साथ ही राखी नहीं बांधी जाती है। माना जाता है कि अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोको में घूमती है। जब भद्रा पृथ्वीलोक में रहती है तो इस समय सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यही कारण है कि लोग राखी बांधते समय भद्राकाल का ध्यान रखते हैं और शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधते हैं।
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भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक रक्षाबंधन पर्व पर इस बार भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनों को दोपहर तक का इंतजार करना होगा। दरअसल, रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया रहेगा। इसलिए दोपहर डेढ़ बजे तक भाइयों की कलाई पर राखी नहीं सज सकेगी। राखी बांधने के लिए पूरे दिन में करीब 7:37 घंटे का शुभ मुहूर्त रहेगा।
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि इस साल पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त को सुबह 3:04 बजे शुरू होकर रात 11:55 बजे समाप्त होगी। शास्त्र और मुहूर्त में भद्राकाल को अशुभ माना गया है। इसलिए भद्राकाल में भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधनी चाहिए। भद्राकाल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत के साथ ही शुरू हो जाएगा और दोपहर 1:30 बजे समाप्त होगा। इसलिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर 1:30 से रात 9:07 तक रहेगा। कुल मिलाकर शुभ मुहूर्त 7 घंटे 37 मिनट का होगा।
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Iभद्रा में क्यों नहीं होते शुभ कार्यI
आचार्य बताते हैं कि भद्राकाल के समय को अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य के साथ ही राखी नहीं बांधी जाती है। माना जाता है कि अलग-अलग राशियों के अनुसार भद्रा तीनों लोको में घूमती है। जब भद्रा पृथ्वीलोक में रहती है तो इस समय सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यही कारण है कि लोग राखी बांधते समय भद्राकाल का ध्यान रखते हैं और शुभ मुहूर्त में ही राखी बांधते हैं।
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