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Dehradun News: इस बार लीची के पेड़ों में आई अच्छी बौर, बागवानों के चेहरे खिले
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विकासनगर। इस बार क्षेत्र में लीची की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है। बगीचों में पेड़ों पर लदी बौर ने किसानों के चहरे पर रौनक बिखेर दी है। कई ऐसे बगीचों में भी इस बार बौर आई है, जिनमें कई साल से फल नहीं लगे थे। बागवानी विशेष इसके पीछे की वजह मौसम में आए बदलाव को मान रहे हैं।
पछवादून क्षेत्र लीची के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां करीब 500 हेक्टेयर में इसका उत्पादन होता है। लीची की दूसरे राज्यों की मंडियों में भारी डिमांड रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी डॉ. एके शर्मा ने बताया कि इस साल फरवरी और मार्च की शुरुआत में अधिक गर्मी पड़ने से अच्छी बौर आई है। जिन बगीचों में कई साल से फल नहीं आए, उनमें भी बौर आई है। इससे अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जून माह के अंतिम और जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में लीची की फसल तैयार हो जाती है। इस बीच बागवानों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञों की सलाह लेने की बात कही है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. एमपी शाही ने कहा कि बौर अच्छी आने से उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है। दाना आने पर बगीचें की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि फ्रूट ड्रॉपिंग (फल गिरने) की समस्या उत्पन्न न हो। दाना बनने पर फंगस लगने की भी आशंका रहती है। इससे फल काला पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में बावस्टीन या फिर एम-45 की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
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पछवादून क्षेत्र लीची के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां करीब 500 हेक्टेयर में इसका उत्पादन होता है। लीची की दूसरे राज्यों की मंडियों में भारी डिमांड रहती है। कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के प्रभारी डॉ. एके शर्मा ने बताया कि इस साल फरवरी और मार्च की शुरुआत में अधिक गर्मी पड़ने से अच्छी बौर आई है। जिन बगीचों में कई साल से फल नहीं आए, उनमें भी बौर आई है। इससे अच्छे उत्पादन की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जून माह के अंतिम और जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में लीची की फसल तैयार हो जाती है। इस बीच बागवानों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञों की सलाह लेने की बात कही है।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. एमपी शाही ने कहा कि बौर अच्छी आने से उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है। दाना आने पर बगीचें की सिंचाई करनी चाहिए, ताकि फ्रूट ड्रॉपिंग (फल गिरने) की समस्या उत्पन्न न हो। दाना बनने पर फंगस लगने की भी आशंका रहती है। इससे फल काला पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में बावस्टीन या फिर एम-45 की दो ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।
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