{"_id":"66380924cfac7fec25011fb5","slug":"there-is-no-nurse-in-maternal-and-child-welfare-center-rajawala-for-one-year-one-has-to-go-to-chc-for-delivery-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1013-406772-2024-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र राजावाला में एक साल से नर्स नहीं, प्रसव के लिए जाना पड़ रहा सीएचसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र राजावाला में एक साल से नर्स नहीं, प्रसव के लिए जाना पड़ रहा सीएचसी
विज्ञापन
मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र में एक साल से नर्सिंग अफसर नहीं हैं। केंद्र से जुड़े नौ उपकेंद्रों में पंजीकृत गर्भवतियों को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाना पड़ता है। खासकर रात में प्रसव पीड़ा होने पर परेशानी अधिक बढ़ जाती है।
मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र राजावाला से नौ मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र जुड़े हैं। इसमें भाऊवाला, तिलवाड़ी, डूंगा, झाझरा, सुद्धोवाला, कोटडा, आमवाला, पौंधा, राजावाला शामिल हैं। यहां पहले उपकेंद्रों से गर्भवतियों को प्रसव के लिए लाया जाता था। केंद्र में हर माह 15 से 20 प्रसव हुआ करते थे। करीब एक साल पहले केंद्र में तैनात नर्सिंग ऑफिसर को सीएचसी सहसपुर अटैच कर दिया गया। उसके बाद से केंद्र में प्रसव की सुविधा ठप पड़ी है। केंद्र से करीब 12 हजार की आबादी जुड़ी है।
क्षेत्र से सीएचसी सहसपुर की दूरी करीब 11 किलोमीटर है। प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवतियों को लेकर सीएचसी जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने के कारण कई बार परिजन गर्भवतियों को आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती करवा देते हैं। इससे लोगों पर निजी अस्पताल के महंगे खर्च का बोझ पड़ता है।
विज्ञापन
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ चंद्रशेखर पंत ने कहा कि नर्सिंग अफसर को सीएचसी सहसपुर में अटैच किया गया है। इसके चलते गर्भवतियों को प्रसव की सुविधा नहीं मिल पा रही है। जल्द ही नर्सिंग अफसर के सीएचसी से रिलीव होने पर केंद्र में दोबारा प्रसव की सुविधा शुरू हो जाएगी।
विज्ञापन
मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र राजावाला से नौ मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र जुड़े हैं। इसमें भाऊवाला, तिलवाड़ी, डूंगा, झाझरा, सुद्धोवाला, कोटडा, आमवाला, पौंधा, राजावाला शामिल हैं। यहां पहले उपकेंद्रों से गर्भवतियों को प्रसव के लिए लाया जाता था। केंद्र में हर माह 15 से 20 प्रसव हुआ करते थे। करीब एक साल पहले केंद्र में तैनात नर्सिंग ऑफिसर को सीएचसी सहसपुर अटैच कर दिया गया। उसके बाद से केंद्र में प्रसव की सुविधा ठप पड़ी है। केंद्र से करीब 12 हजार की आबादी जुड़ी है।
विज्ञापन
क्षेत्र से सीएचसी सहसपुर की दूरी करीब 11 किलोमीटर है। प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवतियों को लेकर सीएचसी जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने के कारण कई बार परिजन गर्भवतियों को आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती करवा देते हैं। इससे लोगों पर निजी अस्पताल के महंगे खर्च का बोझ पड़ता है।
विज्ञापन
प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ चंद्रशेखर पंत ने कहा कि नर्सिंग अफसर को सीएचसी सहसपुर में अटैच किया गया है। इसके चलते गर्भवतियों को प्रसव की सुविधा नहीं मिल पा रही है। जल्द ही नर्सिंग अफसर के सीएचसी से रिलीव होने पर केंद्र में दोबारा प्रसव की सुविधा शुरू हो जाएगी।