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Dehradun News: सरकारी और अशासकीय स्कूलों के बीच अपनाया जा रहा दोहरा रवैया
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देहरादून। अशासकीय विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन ने सरकारी और अशासकीय स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या के लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। एसोसिएशन के संरक्षक डॉ. सुनील अग्रवाल ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा है। पत्र में सरकार के अशासकीय स्कूलों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैये पर असंतोष व्यक्त किया गया है।
एसोसिएशन ने कहा, अशासकीय स्कूलों को शासन से कोई सहायता नहीं मिलती। सरकारी नीतियों में सरकारी और अशासकीय स्कूलों के बीच दोहरा रवैया अपनाया जाता है। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग के गठन को प्रबंधकों के अधिकारों का हनन बताया गया है। डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा, सरकारी और अशासकीय स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होती है। उन्हें उपयुक्त वेतन भी मिलता है। इसके बावजूद छात्रों की घटती संख्या शासन के कुप्रबंधन का नतीजा है। स्कूल आधारभूत सुविधाओं के लिए तरह रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। उन्होंने कहा, सरकारी और अशासकीय स्कूलों में व्यवस्थाएं ठीक की जाएं ताकि छात्रों को प्रवेश के लिए प्रेरित किया जा सके।
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एसोसिएशन ने कहा, अशासकीय स्कूलों को शासन से कोई सहायता नहीं मिलती। सरकारी नीतियों में सरकारी और अशासकीय स्कूलों के बीच दोहरा रवैया अपनाया जाता है। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोग के गठन को प्रबंधकों के अधिकारों का हनन बताया गया है। डॉ. सुनील अग्रवाल ने कहा, सरकारी और अशासकीय स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर होती है। उन्हें उपयुक्त वेतन भी मिलता है। इसके बावजूद छात्रों की घटती संख्या शासन के कुप्रबंधन का नतीजा है। स्कूल आधारभूत सुविधाओं के लिए तरह रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप छात्र संख्या लगातार कम हो रही है। उन्होंने कहा, सरकारी और अशासकीय स्कूलों में व्यवस्थाएं ठीक की जाएं ताकि छात्रों को प्रवेश के लिए प्रेरित किया जा सके।
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