लोस चुनाव से पहले टिहरी बांध विस्थापितों को तोहफा, पुराने सभी बिलों की 70 करोड़ की देनदारी माफ
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लोकसभा चुनाव में जाने से पहले त्रिवेंद्र सरकार ने टिहरी बांध से विस्थापित करीब दस हजार लोगों को तोहफा दिया है। कैबिनेट बैठक में बांध विस्थापितों के पानी-सीवर के पुराने सारे बिल माफ कर दिए गए हैं।
यह बिल करीब 70 करोड़ रुपये के हैं। विस्थापितों से भविष्य में बिल वसूला जाए या न जाए, इसके परीक्षण के लिए सरकार ने पेयजल मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में एक कमेटी गठन का निर्णय लिया है।
टिहरी बांध विस्थापितों से पानी-सीवर का बिल लेेने का मामला लंबे समय से उठता रहा है। 2011 में भाजपा और 2012 में कांग्रेस राज में भी तत्कालीन मुख्यमंत्रियों के स्तर पर पानी-सीवर के बिल माफ करने की घोषणा की गई, लेकिन इन पर तकनीकी वजहों से अमल नहीं हो पाया।
लोकसभा चुनाव से पहले रविवार को हुई त्रिवेंद्र कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। बैठक में बताया गया कि उत्तराखंड जल संस्थान को नई टिहरी में निर्मित सीवरेज योजना 2006-07 और पेयजल योजना 2010-11 में रखरखाव और संचालन के लिए हस्तांतरित की गई थी। इसी प्रकार, अन्य पुनर्वास स्थलों पर भी समय समय पर पेयजल/सीवर योजनाएं विकसित हुईं।
इन सभी का संचालन जल संस्थान के स्तर पर किया जा रहा है। प्रस्ताव में बताया गया कि नई टिहरी समेत अन्य पुनर्वास कालोनियों में कुल 9909 पानी के कनेक्शन हैं। इनमें से 3093 उपभोक्ताओं के ही स्तर पर बिलों का भुगतान किया जा रहा है।
बाकी 6819 उपभोक्ता शुरू से ही जल मूल्य का भुगतान नहीं कर रहे हैं। ये ही नहीं, नई टिहरी और देहरादून की पुनर्वास कालोनी देहरा खास में जल संस्थान के स्तर पर सीवर व्यवस्था का संचालन किया जा रहा है। कैबिनेट ने प्रस्ताव पर चर्चा के बाद पुराना जल मूल्य और सीवर शुल्क को माफ करने का निर्णय ले लिया।