भारतीय जुड़वा बहनों ने वो किया जो दुनिया में कोई न कर सका
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दुनिया की सबसे ऊंची सात पर्वत चोटियां और दोनों ध्रुवों पर तिरंगा फहराने के बाद उत्तराखंड की ताशी-नुंग्शी फिर पर्वतों की ऊंचाईयां नापने निकल पड़ी हैं।
ताशी-नुंग्शी ने दक्षिण अफ्रीका सबसे ऊंची पर्वत चोटी माउंट किलिमंजारो पर दूसरी बार तिरंगा फहराने में कामयाबी हासिल की है। इसके साथ ही ताशी-नुंग्शी मिशन 2 फॉर 7 और ऊंचाईयों से आगे दुनिया की हद तक मिशन सबसे कम समय पूरा करने वाली पहली दक्षिण एशियाई जुड़वा बहनें बन गई हैं।
जोहड़ी गांव निवासी ताशी-नुंग्शी ने फरवरी 2012 में पहली बार दक्षिण अफ्रीका की 19341 फीट ऊंची पर्वत चोटी माउंट किलिमंजारो पर फतह की थी। इसके बाद मई 2013 में माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के साथ ही ताशी-नुंग्शी ने एक्सप्लोरेर्स ग्रैंड स्लैम और थ्री पोल चैलेंज की शुरुआत की थी।
28 जून को मिशन के लिए निकलीं थी ताशी नुंग्शी
21 अप्रैल 2015 में दोनों बहनों ने उत्तरी ध्रुव पहुंचकर अपना मिशन पूरा कर लिया था। ताशी-नुंग्शी के पिता वीएस मलिक ने बताया कि दोनों बहनों को यह मिशन पूरा करने में 3 साल से अधिक समय लग रहा था। इसे कम करने के लिए माउंट किलिमंजारो पर दूसरी बार फतह की गई।
बताया कि न्यूजीलैंड में खेल डिप्लोमा की पढ़ाई कर रही ताशी-नुंग्शी 28 जून को मिशन के लिए निकलीं थी और करीब नौ हजार फीट ऊंचाई पर स्थित बेस कैंप नेशनल पार्क किलिमंजारो पहुंची थीं। एक जुलाई को दोनों ने चढ़ाई शुरू की और बीते शुक्रवार (3 जुलाई) को दोनों पर्वत की चोटी में पहुंच गई।
उन्होंने कहा कि अब दोनों बहनों ने 2 साल एक महीने का समय लेकर दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियां, दक्षिणी और उत्तरी ध्रुव पर पहुंचने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।