पढ़ें, यज्ञ पद्धति से कैसे दूर होगा स्वाइन फ्लू
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ये शुभ्रा घोरवर्पस: सुक्षत्रासु सो रीषादस:, मरूद्भिरग्न अगही। ऋग्वेद के इस मंत्र के अनुसार जो यज्ञ के धुएं से पवित्र वायु रोगों को दूर करती है।
स्वाइन फ्लू के प्रकोप को कम करने के लिए इस बार होलिका दहन सामूहिक हवन के रूप में होगा। वातावरण में फैले रोग के किटाणुओं का नाश करने के लिए लोग मिलकर कपूर, इलायची, लांग आदि सामग्री की आहुति देंगे।
इस संबंध में लोग एक-दूसरे को व्हाट्स एप, फेसबुक पर संदेश भेजकर होलिका दहन में शामिल होने का न्यौता दे रहे हैं। लोगों का मानना है कि पूरे शहर में एक साथ होलिका दहन होगा, तो स्वाइन फ्लू का सफाया हो जाएगा।
कुर्मांचल परिषद माजरा की अध्यक्ष सुष्मिता मनराल ने बताया कि माजरा की प्रकाश लोक कॉलोनी में रहने वाले करीब दो सौ लोग एक साथ मिलकर होलिका में कपूर, इलायची अर्पित करेंगे। इससे वातावरण शुद्ध होगा और रोगों का नाश होगा।
वेदों में भी इस बात का जिक्र है
नेशविला रोड वेलफेयर एसोसिएशन की सचिव सीमा जौहर ने बताया कि इस बार सभी परिवार होलिका में देसी कपूर और इलायची चढ़ाएंगे।
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार सभी वेदों में इस बात का जिक्र है कि कपूर, इलायची आदि हवन सामग्री से वातावरण शुद्ध होता है। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार देसी कपूर से देवताओं की आरती भी की जाती है। यह कपूर बेहद पवित्र माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
होलिका दहन पांच मार्च को होगा। जबकि गुलाल 6 मार्च को खेला जाएगा। पंडितों के अनुसार होलिका दहन का शुभ समय पांच मार्च को शाम 6.15 से 7.45 बजे तक है।
प्रदोषकाल में ही होलिका दहन करना शुभ है। इसके पश्चात रात्रि 9.10 से 11.25 बजे तक होलिका दहन करने का शुभ समय है।