'पहले 31 हजार चुकाओ फिर ले जाओ स्वाइन फ्लू की दवा'
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए जानलेवा बनती जा रही है। लगातार हो रही मौत और तेजी से बढ़ रहे मरीजों की तादाद के बावजूद भुगतान नहीं होने पर दिल्ली की दवा कंपनी ने विभाग को दवा सप्लाई से मना कर दिया है।
कंपनी का विभाग पर करीब 31 हजार रुपये बकाया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने इस बाबत अतिशीघ्र बजट जारी करने का दावा किया था।
स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली की दवा कंपनी हाइड्रो ड्रग्स लिमिटेड से 1050 टेमी फ्लू के कैप्सूल मंगाए थे। इसमें 350 कैप्सूल दून अस्पताल को दिए गए थे। 100 कैप्सूल सीएमओ स्टोर में थे। बाकी डिस्ट्रिक सर्विलांस अफसर को दिए गए। यह दवाएं खत्म होने वाली है। इस पर विभाग ने कंपनी को छह आर्डर और भेजे, लेकिन कंपनी ने दवा देने से मना कर दिया।
कंपनी अफसरों ने विभाग से कहा है उसने आर्डर लॉक कर दिए हैं। बकाया भुगतान के बाद ही दवा आपूर्ति की जाएगी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नई दवा कंपनी राजस्थान ड्रग्स लिमिटेड एंड फार्मास्युटिकल्स को 1100, 1200 और 900 टेमीफ्लू कैप्सूल के अलग-अलग छह आर्डर भेजे हैं।
नई कंपनी बिना पेशगी लिए पहली खेप सप्लाई करेगी। मगर वक्त पर भुगतान नहीं हुआ तो यह कंपनी भी दवा सप्लाई नहीं करेगी। सवाल उठता है कि इसके बाद रोगी बढ़ने और उनके संपर्क में आने वालों को विभाग कहां से दवा देगा। सीएमओ डा. एसपी अग्रवाल का कहना है कि जैसे ही महानिदेशक कार्यालय से पैसा आ जाएगा, भुगतान कर दिया जाएगा।
देर से दवा मिलने पर रोगी को खतरा
स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कम्युनिकेबिल डिजीजेज (एनआईसीडी) दिल्ली भेजे जाने वाले सैंपल की रिपोर्ट आने में एक हफ्ता लग रहा है। अभी तक तीन दिन में रिपोर्ट आ जाती थी।
जांच रिपोर्ट आने में देरी की वजह एनआईसीडी में सैंपलों की भरमार बताई जा रही है। इंस्टीट्यूट में पूरे देश से स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैंपल भेजे जाते हैं।
सूत्रों का कहना है कि दवाओं की कमी से स्वास्थ्य महकमा कह रहा है कि रोगी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद ही टेमी फ्लू दी जाएगी। ऐसी स्थिति में पुष्टि की रिपोर्ट देर से आती है तो रोगी को एक हफ्ते तक दवा नहीं मिल पाएगी। ऐसे में मरीज को नुकसान भी हो सकता है।
वरिष्ठ फिजिशियन डा. महावीर सिंह के मुताबिक अगर मरीज में स्वाइन फ्लू के ‘सीवियर’ लक्षण हैं तो टेमी फ्लू दे देनी चाहिए। अगर रोगी ऐसी जगह से आया है, जहां स्वाइन फ्लू फैला हो या वह पुष्ट मरीज के संपर्क में रहा हो तो भी टेमी फ्लू दे देनी चाहिए। दवा में देरी पर मरीज को नुकसान हो सकता है।