फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   swine flu medicine problem in uttarakhand

'पहले 31 हजार चुकाओ फिर ले जाओ स्वाइन फ्लू की दवा'

Wed, 18 Feb 2015 10:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 18 Feb 2015 10:50 AM IST
विज्ञापन
swine flu medicine problem in uttarakhand

उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए जानलेवा बनती जा रही है। लगातार हो रही मौत और तेजी से बढ़ रहे मरीजों की तादाद के बावजूद भुगतान नहीं होने पर दिल्ली की दवा कंपनी ने विभाग को दवा सप्लाई से मना कर दिया है।

विज्ञापन


कंपनी का विभाग पर करीब 31 हजार रुपये बकाया है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने इस बाबत अतिशीघ्र बजट जारी करने का दावा किया था।

स्वास्थ्य विभाग ने दिल्ली की दवा कंपनी हाइड्रो ड्रग्स लिमिटेड से 1050 टेमी फ्लू के कैप्सूल मंगाए थे। इसमें 350 कैप्सूल दून अस्पताल को दिए गए थे। 100 कैप्सूल सीएमओ स्टोर में थे। बाकी डिस्ट्रिक सर्विलांस अफसर को दिए गए। यह दवाएं खत्म होने वाली है। इस पर विभाग ने कंपनी को छह आर्डर और भेजे, लेकिन कंपनी ने दवा देने से मना कर दिया।
विज्ञापन


कंपनी अफसरों ने विभाग से कहा है उसने आर्डर लॉक कर दिए हैं। बकाया भुगतान के बाद ही दवा आपूर्ति की जाएगी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नई दवा कंपनी राजस्थान ड्रग्स लिमिटेड एंड फार्मास्युटिकल्स को 1100, 1200 और 900 टेमीफ्लू कैप्सूल के अलग-अलग छह आर्डर भेजे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नई कंपनी बिना पेशगी लिए पहली खेप सप्लाई करेगी। मगर वक्त पर भुगतान नहीं हुआ तो यह कंपनी भी दवा सप्लाई नहीं करेगी। सवाल उठता है कि इसके बाद रोगी बढ़ने और उनके संपर्क में आने वालों को विभाग कहां से दवा देगा। सीएमओ डा. एसपी अग्रवाल का कहना है कि जैसे ही महानिदेशक कार्यालय से पैसा आ जाएगा, भुगतान कर दिया जाएगा।

देर से दवा मिलने पर रोगी को खतरा

swine flu medicine problem in uttarakhand

स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ कम्युनिकेबिल डिजीजेज (एनआईसीडी) दिल्ली भेजे जाने वाले सैंपल की रिपोर्ट आने में एक हफ्ता लग रहा है। अभी तक तीन दिन में रिपोर्ट आ जाती थी।

जांच रिपोर्ट आने में देरी की वजह एनआईसीडी में सैंपलों की भरमार बताई जा रही है। इंस्टीट्यूट में पूरे देश से स्वाइन फ्लू की जांच के लिए सैंपल भेजे जाते हैं।

सूत्रों का कहना है कि दवाओं की कमी से स्वास्थ्य महकमा कह रहा है कि रोगी को स्वाइन फ्लू की पुष्टि के बाद ही टेमी फ्लू दी जाएगी। ऐसी स्थिति में पुष्टि की रिपोर्ट देर से आती है तो रोगी को एक हफ्ते तक दवा नहीं मिल पाएगी। ऐसे में मरीज को नुकसान भी हो सकता है।

वरिष्ठ फिजिशियन डा. महावीर सिंह के मुताबिक अगर मरीज में स्वाइन फ्लू के ‘सीवियर’ लक्षण हैं तो टेमी फ्लू दे देनी चाहिए। अगर रोगी ऐसी जगह से आया है, जहां स्वाइन फ्लू फैला हो या वह पुष्ट मरीज के संपर्क में रहा हो तो भी टेमी फ्लू दे देनी चाहिए। दवा में देरी पर मरीज को नुकसान हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed