...तो ऐसे सामने आ सकेगा स्वामी सानंद की मृत्यु का सच, चेहरा होगा बेनकाब
स्वामी सानंद की मृत्यु के मामले में एक यह सच सामने आना बाकी है कि आखिर वो कौन शख्स है जो सानंद को अपना अनशन खत्म करने से बार-बार रोक रहा था ? इस बारे में एम्स निदेशक के बयान की जांच हो तो शायद वो चेहरा बेनकाब हो जाए।
अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या सानंद का कोई परिजन सामने आकर इस मामले की जांच की मांग पुलिस से करेगा या फिर सानंद को अनशन खत्म करने से रोकने वाला वो शख्श गुमनाम ही रहेगा ? सूत्रों का कहना है कि पुलिस को भी इस मामले में किसी शिकायत का इंतजार है।
ऋषिकेश एम्स में स्वामी सानंद की मृत्यु के बाद वहां के निदेशक डॉ. रविकांत ने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा कि वे दावे के साथ कह सकते हैं कि स्वामी अपना अनशन समाप्त करने का मन बना चुके थे, लेकिन कोई उन्हें ऐसा न करने के लिए लगातार रोक रहा था।
स्वामी सानंद का कोई भी परिजन जांच की मांग को लेकर पुलिस तक नहीं पहुंचा
बकौल निदेशक, अनशन समाप्त करने से रोकने के लिए सानंद को कोई बार-बार फोन और एसएमएस कर रहा था। निदेशक ने उस शख्श का नाम फिलहाल उजागर न करने की बात की थी।
खास बात यह भी है कि एम्स निदेशक का बयान मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद भी स्वामी सानंद का कोई भी परिजन इसकी जांच की मांग को लेकर पुलिस तक नहीं पहुंचा है।
इतना ही नहीं, मातृ सदन के स्वामी शिवानंद एम्स निदेशक के बयान को स्वामी सानंद की हत्या की साजिश का प्रमाण बताते हुए अपना बयान तो जारी कर रहे हैं। लेकिन, इसकी जांच के लिए पुलिस प्रशासन को उनकी ओर से भी अब तक कोई मांग या शिकायती पत्र नहीं दिया गया है।
निदेशक का कथन हत्या की साजिश का प्रमाण: शिवानंद
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने एम्स निदेशक रविकांत के बयान को सानंद की हत्या की साजिश का प्रमाण बताया है। साथ ही यह भी कहा कि इस बयान में इसलिए कोई सच्चाई नहीं हो सकती, क्योंकि 112 दिन से अनशन कर रहे स्वामी सानंद खुद फोन का प्रयोग नहीं कर रहे थे।
स्वामी शिवानंद ने कहा कि अगर सानंद को कोई बात करनी होती थी तो वे मातृसदन का फोन प्रयोग करते थे या उनके सहायक प्रेम नारायण के फोन से ही बात होती थी। यदि किसी ने स्वामी सानंद को फोन या एसएमएस करके दबाव बनाया तो उसके बारे में मातृसदन या प्रेम नारायण को पता होना चाहिए। सवाल यह भी है कि एम्स निदेशक को यह जानकारी कहां से मिली ? निदेशक की स्वामी सानंद से कभी मुलाकात भी नहीं हुई।
इसके बावजूद निदेशक को कोई जानकारी है तो उन्हें पूरी बात स्पष्ट करनी चाहिए कि सानंद को अनशन समाप्त करने से रोकने वाले लोग कौन हैं। अगर निदेशक ने किसी के दबाव में आकर गलत बयानबाजी की है तो उन पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। स्वामी ने कहा कि निदेशक के खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए मातृसदन सभी संभावनाओं पर विचार कर रहा है।