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Dehradun News: निशा की मौत की जांच के लिए मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
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Iदून अस्पताल के स्टाफ पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया था
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Iमुख्यमंत्री, मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक को लिखा पत्रI
दून अस्पताल की इमरजेंसी में साहिया के समाल्टा गांव की बुखार पीड़िता निशा की हुई संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग हो रही है। संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव सुशील त्यागी ने मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
पत्र में कहा है कि बुखार से पीड़ित निशा को विकासनगर के सरकारी अस्पताल में उपचार न मिलने के कारण दून अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। निशा के परिजनों ने आरोप लगाए हैं कि गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से उसकी मौत हुई है। दून अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने जो जांच की गई है यह संदिग्ध साबित होगी। इसपर विश्वास करना मुश्किल होगा। इसके लिए गहन जांच जरूरी है। मृतका के परिजनों की शिकायत पर पुलिस विभाग ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक से भी अनुरोध किया गया है कि परिजनों की शिकायत पर निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए। अन्यथा आमजन का विश्वास सरकारी व्यवस्थाओं से उठ जाएगा।
I- यह था मामलाI
दून अस्पताल में बीते मंगलवार रात 18 वर्षीय युवती की मौत पर परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया था। इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने कमेटी बनाकर जांच की थी। जांच के दौरान आरोपी डॉक्टर और नर्स की बात भी सुनी गई। इसमें पता चला कि युवती को कार्डियक अरेस्ट आया था इससे मौत हुई है। युवती की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया था। शासन से युवती की मौत की निष्पक्ष जांच, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये मुआवजा मांगा है।
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Iमुख्यमंत्री, मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक को लिखा पत्रI
दून अस्पताल की इमरजेंसी में साहिया के समाल्टा गांव की बुखार पीड़िता निशा की हुई संदिग्ध मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग हो रही है। संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव सुशील त्यागी ने मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
पत्र में कहा है कि बुखार से पीड़ित निशा को विकासनगर के सरकारी अस्पताल में उपचार न मिलने के कारण दून अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। निशा के परिजनों ने आरोप लगाए हैं कि गलत इंजेक्शन लगाने की वजह से उसकी मौत हुई है। दून अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने जो जांच की गई है यह संदिग्ध साबित होगी। इसपर विश्वास करना मुश्किल होगा। इसके लिए गहन जांच जरूरी है। मृतका के परिजनों की शिकायत पर पुलिस विभाग ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इस संबंध में पुलिस महानिदेशक से भी अनुरोध किया गया है कि परिजनों की शिकायत पर निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए। अन्यथा आमजन का विश्वास सरकारी व्यवस्थाओं से उठ जाएगा।
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I- यह था मामलाI
दून अस्पताल में बीते मंगलवार रात 18 वर्षीय युवती की मौत पर परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया था। इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने कमेटी बनाकर जांच की थी। जांच के दौरान आरोपी डॉक्टर और नर्स की बात भी सुनी गई। इसमें पता चला कि युवती को कार्डियक अरेस्ट आया था इससे मौत हुई है। युवती की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया था। शासन से युवती की मौत की निष्पक्ष जांच, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और एक करोड़ रुपये मुआवजा मांगा है।
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