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छटा कोहरा, यूपी के बराबर हुआ गन्ना मूल्य
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 07 Jan 2015 10:21 AM IST
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उत्तराखंड कैबिनेट के फैसले के मुताबिक गन्ना मूल्य का शासनादेश जारी कर दिया गया। अगेती प्रजातियों के लिए 290 रुपए प्रति कुंतल और साधारण प्रजातियों के लिए 280 रुपए प्रति कुंतल मूल्य रखा गया है।
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संकट को कम करने की कोशिश
मंगलवार को सरकार ने करीब 20 रुपए प्रति कुंतल की छूट और प्रतिपूर्ति देकर चीनी मिलों पर गहराए संकट को कम करने की कोशिश भी की है। शासनादेश के मुताबिक मिलों को पहली किस्त का भुगतान गन्ना आपूर्ति के 14 दिन के अंदर 250 और 240 रुपए प्रति कुंतल की दर से करना होगा।
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दूसरी किस्त पेराई समाप्त होने के बाद तीन माह के अंदर देनी होगी। तीन माह के अंदर भुगतान न करने वाली मिल को शेष 40 रुपए का ब्याज बकाए गन्ना मूल्य में जोड़ कर अदा करना होगा। यह गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश के बराबर है पर प्रदेश के पिछले साल के गन्ना मूल्य से पांच रुपए कम है। ऐसे में गन्ना मूल्य को लेकर किसान विरोध जता सकते हैं।
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दूसरी ओर शासन ने चीनी मिलों पर गहराए संकट को कम करने की कोशिश भी की है। शेष 40 रुपए में से 20 रुपए की छूट मिलों को सोसायटी कमीशन, गन्ना क्रयकर, चीनी प्रवेश कर में दी जाएगी। इसमें 8.60 रुपए प्रति कुंतल की नगद प्रतिपूर्ति भी शामिल है। गन्ना मूल्य में परिवहन की कटौती पूर्व की भांति 11 रुपये रुखी गई है।
ये पड़ेगा फर्क
- सोसायटी कमीशन के रूप में 6.60 रुपए प्रति कुंतल की छूट देने पर सरकार को 21.45 करोड़ रुपए का खर्च उठाना होगा। यह गन्ना समितियों का नुकसान है, जिसकी भरपाई सरकार करेगी।
- गन्ना क्रय में दो रुपए प्रति कुंतल की छूट देने से सरकार को 6.50 करोड़ रुपए का राजस्व नहीं मिलेगा। सरकार शक्कर विशेष निधि में यह पैसा गन्ना विभाग को देगी।
- 8.60 रुपए की प्रतिपूर्ति मिलों को देने पर सरकार को 27.95 करोड़ रुपए का नुकसान वहन करना होगा।
- 2.80 रुपए प्रति कुंतल की छूट देने पर चीनी मिलों को 9.10 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मदद मिलेगी।
इसके साथ ही चीनी मिलों से यह भी कहा गया है कि एक अक्तूबर 2014 से लेकर 31 मई 2015 तक चीनी, शीरा, बैगास, प्रैसमैड का औसत बाजार मूल्य अगर क्रमश: 3100, 390, 167, 26 रुपए प्रति कुंतल से कम रहता है तो रियायत में कमी की जा सकती है। इसके लिए गन्ना मंत्री की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा।
- चीनी मिलों के शीरे पर आबकारी विभाग को दिए जाने वाले 20 रुपए प्रति कुंतल का प्रशासनिक व्यय समाप्त कर दिया गया है।