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पहाड़ी जिलों को सब्सिडी और मुफ्त बिजली

Fri, 17 Oct 2014 09:44 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 17 Oct 2014 09:44 AM IST
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subsidiary electricity for mountain district

पर्वतीय जिलों में उद्योगों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष पर्वतीय नीति में एक और बदलाव किया गया है। गुरुवार को सचिवालय में मुख्य सचिव की बैठक में संशोधित ड्राफ्ट को अंतिम रूप भी दे दिया गया।

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फाइनल ड्राफ्ट के तहत सरकार अब पहाड़ में उद्योग लगाने पर बिजली में शत प्रतिशत की छूट देगी। इसकेसाथ ही कैपीटल सब्सिडी भी 25 से बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दी गई है।
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प्रदेश में 2003 में विशेष औद्योगिक पैकेज के लागू होने केबाद असंतुलित विकास का मुद्दा भी उठा था। विशेष पैकेज के तहत मैदानी क्षेत्रों में तो उद्योग स्थापित हुए पर पर्वतीय क्षेत्र वंचित रह गए।
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इस स्थिति को देखते हुए ही तत्कालीन भाजपा सरकार ने विशेष पर्वतीय औद्योगिक नीति लागू की थी। इसी नीति में अब प्रदेश सरकार ने और बदलाव कर दिए हैं। क्षेत्रों की श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार के मुताबिक पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों को स्थापित करने के लिए सरकार 70 औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण भी करेगी। 100 स्थानों पर लैंड बैंक चयनित भी कर लिए गए हैं।

कच्चे माल के ढुलान पर भी सब्सिडी

subsidiary electricity for mountain district

संशोधन के तहत कच्चे माल के ढुलान पर भी सब्सिडी का प्रावधान रखा गया है। यह उद्यमियों की जरूरत भी थी। कारण यह भी है कि पर्वतीय जिलों में ट्रांसपोर्टेशन खासा महंगा है और उत्पादन लागत को बढ़ाने वाला साबित होता है।

उद्योगों की दूसरी जरूरत बिजली की है। हालांकि उद्यमियों की निगाह में बिजली की लगातार आपूर्ति जरूरी है पर बिजली में शत प्रतिशत छूट मिलना भी इन्हें भा रहा है। बताया गया कि संशोधित ड्राफ्ट को जल्दी ही कैबिनेट में रखा जाएगा।

क्या रही स्थिति
-विशेष पर्वतीय औद्योगिक नीति 2008 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने लागू की थी। उस समय मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी थे। बाद में 2011 में इस नीति में संशोधन भी किया गया।
-इस नीति के तहत पर्वतीय जिलो में करीब 590 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश हो चुका है। वर्ष 2013-14 में करीब 939 छोटी और मध्यम इकाइयां इस नीति के तहत स्थापित हुई। जनवरी 2014 तक इनमें 73 करोड़ का पूंजी निवेश हुआ था। इस नीति का सबसे अधिक फायदा टिहरी और पौड़ी को हुआ। टिहरी में 2014 में 126 और पौड़ी में 192 इकाइयां स्थापित हुईं।

ये है संशोधित ड्राफ्ट

subsidiary electricity for mountain district

ए श्रेणी (सीमांत जिले)के क्षेत्रों के लिए
-पूंजी निवेश सब्सिडी-25 से बढ़ाकर 35 प्रतिशत
-ब्याज सब्सिडी-छह से बढ़ाकर सात प्रतिशत

बी श्रेणी के क्षेत्रों के लिए
-पूंजी निवेश सब्सिडी-20 से बढ़ाकर 30 प्रतिशत
-ब्याज सब्सिडी-पांच से बढ़ाकर छह प्रतिशत
बिजली- पहले 100 किलोवाट तक 75 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान था। अब शतप्रतिशत सब्सिडी का प्रस्ताव है।
-कच्चे माल के ढुलान पर ए श्रेणी में सात प्रतिशत और बी श्रेणी में पांच प्रतिशत सब्सिडी का प्रस्ताव। पहले इस नीति में परिवहन उपादान के तहत कुल वार्षिक बिक्री का पांच प्रतिशत का प्रावधान था।
-हस्तशिल्प, हथकरघा और खादी के क्त्रस्य में वरीयता का प्रस्ताव
-पर्वतीय क्षेत्रों में 70 और मैदानी क्षेत्रों में 30 स्थानों का चयन उद्योग लगाने के लिये किया गया है। -राज्य सरकार 500 उद्यमियों का चयन कर उद्यमिता कौशल विकसित करेगी।

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