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दारोगा का दर्द: पदक वापस लेने की उठाई मांग

Thu, 05 Jun 2014 01:17 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 05 Jun 2014 01:17 AM IST
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sub inspector nirvikar wrote letter to governor
वन विभाग की भूमि पर पेड़ काटने के मामले में डीजीपी के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने वाले निलंबित दारोगा निर्विकार ने उन्हें दिए गए सभी मेडल वापस लिए की जाने की मांग उठाई है।
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दारोगा ने इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखा और कहा कि एक तरफ शानदार काम के लिए मेडल से नवाजा जाता है और दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने की सजा निलम्बन के रूप में मिलती है।
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सस्पेंड दरोगा ने राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि इस विरोधाभास को दूर किया जाना चाहिए।

डीजीपी के गलत कामों के विरोध पर मिली सजा

sub inspector nirvikar wrote letter to governor

निर्विकार का आरोप है कि उनका कसूर इतना था कि उन्होंने डीजीपी के गलत कार्यों का समर्थन नहीं किया। यही वजह है कि उन्हें हर कदम पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

पहले उनका ट्रांसफर रुद्रप्रयाग किया गया। फिर डीजीपी के खिलाफ शिकायतों की जांच के बजाए उन्हें ही निलंबित कर दिया गया।

इससे भी गंभीर बात यह है कि निलंबन आदेश उनके पैतृक गांव और थाने में भिजवाया गया।

'अगर गलत हूं तो वापस लें सेवा पदक'

sub inspector nirvikar wrote letter to governor

राज्यपाल को लिखे पत्र में निर्विकार ने अपने सराहनीय कार्यों और मिले सेवा पदकों का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि विभाग की नजर में वे गलत हैं तो उनके सेवा पदक भी वापस ले लिए जाएं।

यदि सरकार ने ये गेलंटरी अवार्ड समेत तमाम मैडल मुझे दिए है और आईबी ने बेहतरीन विवेचना करने के लिए मुझे प्रशस्ति पत्र दिया है तो फिर मैं गलत कैसे हो सकता हूं।

मुझे इसलिए प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है क्योंकि सरकार मेरे साथ न्याय करने के बजाय डीजीपी के भ्रष्ट कार्यो में उनका साथ दे रही है। आखिर रिजर्व फॉरेस्ट से पेड़ काटने वाली जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।

पीसी पर रही गहमागहमी
निलंबित दारोगा निर्विकार द्वारा प्रेस वार्ता की अफवाहों के बीच दिन भर गहमागहमी रही। मुख्यालय से लेकर एलआईयू तक यह जानने की कोशिश करती रही कि निर्विकार मीडिया कहां बात कर रहे हैं और उनका एंजेडा क्या है।

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तब सरकार ने अनदेखा कर दिया था सत्यव्रत का पत्र

sub inspector nirvikar wrote letter to governor

राज्य सरकार ने यदि पूर्व डीजीपी सत्यव्रत बंसल के पत्र का संज्ञान लिया होता तो आज यह नौबत नहीं आती। सत्यव्रत ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे मामले का विवरण दिया था।

उन्होंने कहा था कि जांच के बाद यह पाया गया कि रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि के क्रय विक्रय में कतिपय व्यक्तियों द्वारा दुरभिसंधि कर फर्जीवाड़ा करने की संभावना प्रतीत होती है।

क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार की जांच रिपोर्ट पर तत्कालीन एसएसपी व डीआईजी ने भी गहन जांच की सिफारिश की थी। लेकिन सरकार ने तब नहीं सुनी और बीएस सिद्धू को डीजीपी बना दिया। इसके बाद अब एक मामला हाईकोर्ट में है, एक सीजेएम कोर्ट में और तीसरा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।

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