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Dehradun News: गलती संस्थानों की, विवि के चक्कर काट रहे छात्र
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I- विवि प्रशासन ने जताई नाराजगी, निदेशकों को भेजे पत्र
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I- कहा- नियम के अनुरूप प्रकरणों को ही विवि को भेजा जाएI
संस्थानों के स्तर से की गई लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। संस्थान अपने स्तर से प्रकरणों का निस्तारण नहीं कर रहे हैं। बल्कि नियमों के अनुरूप नहीं होने के बाद भी ऐसे प्रकरणों को विश्वविद्यालय को अग्रसारित किया जा रहा है।
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डाॅ. वीके पटेल की ओर से संबद्ध विभिन्न संस्थानों के निदेशकों को पत्र जारी कर बताया गया है कि यह देखने में आ रहा है कि तमाम संस्थान बिना किसी प्रावधान का जिक्र किए छात्रों के प्रकरणों को विवि को अग्रसारित कर रहे हैं। लेकिन, संबंधित प्रकरण नियम के अंतर्गत नहीं होने से उनका समाधान करना संभव नहीं होता। ऐसे में छात्रों और उनके अभिभावकों को बेवजह विवि के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बता दें कि कई मामले परीक्षा रोके जाने से संबंधित होते हैं। जबकि कई बार संस्थान की ओर से प्रैक्टिकल एवं आंतरिक परीक्षाओं के अंक जमा नहीं कराए जाते हैं। कई छात्र ऐसे भी आ रहे हैं, जिन्होंने किसी वजह से परीक्षा फार्म ही नहीं भरा है। कई प्रकरण ऐसे भी आए हैं, जिनमें पाठ्यक्रम की संपूर्ण अवधि पूरी हो चुकी है। इस तरह के प्रकरणों को लेकर विवि ने संस्थान के निदेशकों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकरण के नियम के अंतर्गत होने पर ही उसे विवि को अग्रसारित किया जाए। साथ ही संबंधित छात्र और प्रकरण के बाबत पत्र को जारी करते समय प्रकरण से संबंधित प्रावधान का भी उल्लेख किया जाए। छात्रों को भी इस बाबत निर्देशित करने के लिए कहा गया है कि कोई भी छात्र किसी भी प्रकरण को लेकर सीधे विवि से संपर्क न करें। इसके लिए संस्थान के स्तर से ही प्रकरणों को विवि भेजा जाए।
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I- कहा- नियम के अनुरूप प्रकरणों को ही विवि को भेजा जाएI
संस्थानों के स्तर से की गई लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। संस्थान अपने स्तर से प्रकरणों का निस्तारण नहीं कर रहे हैं। बल्कि नियमों के अनुरूप नहीं होने के बाद भी ऐसे प्रकरणों को विश्वविद्यालय को अग्रसारित किया जा रहा है।
वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डाॅ. वीके पटेल की ओर से संबद्ध विभिन्न संस्थानों के निदेशकों को पत्र जारी कर बताया गया है कि यह देखने में आ रहा है कि तमाम संस्थान बिना किसी प्रावधान का जिक्र किए छात्रों के प्रकरणों को विवि को अग्रसारित कर रहे हैं। लेकिन, संबंधित प्रकरण नियम के अंतर्गत नहीं होने से उनका समाधान करना संभव नहीं होता। ऐसे में छात्रों और उनके अभिभावकों को बेवजह विवि के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बता दें कि कई मामले परीक्षा रोके जाने से संबंधित होते हैं। जबकि कई बार संस्थान की ओर से प्रैक्टिकल एवं आंतरिक परीक्षाओं के अंक जमा नहीं कराए जाते हैं। कई छात्र ऐसे भी आ रहे हैं, जिन्होंने किसी वजह से परीक्षा फार्म ही नहीं भरा है। कई प्रकरण ऐसे भी आए हैं, जिनमें पाठ्यक्रम की संपूर्ण अवधि पूरी हो चुकी है। इस तरह के प्रकरणों को लेकर विवि ने संस्थान के निदेशकों को निर्देशित किया है कि किसी भी प्रकरण के नियम के अंतर्गत होने पर ही उसे विवि को अग्रसारित किया जाए। साथ ही संबंधित छात्र और प्रकरण के बाबत पत्र को जारी करते समय प्रकरण से संबंधित प्रावधान का भी उल्लेख किया जाए। छात्रों को भी इस बाबत निर्देशित करने के लिए कहा गया है कि कोई भी छात्र किसी भी प्रकरण को लेकर सीधे विवि से संपर्क न करें। इसके लिए संस्थान के स्तर से ही प्रकरणों को विवि भेजा जाए।
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