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हड़तालों से हलकान हुआ उत्तराखंड प्रदेश
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Dec 2015 12:35 PM IST
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उत्तराखंड प्रदेश में एक के बाद एक हड़तालों का दौर जारी है। जहां एक ओर प्रदेश में निजी अस्पताल बंद हैं, वहीं कोषागार कर्मचारी चारी भी हड़ताल पर हैं। उधर, लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों की भूख हड़ताल भी जारी है।
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निजी अस्पताल रहे बंद, आज भी नहीं खुलेंगे
सेंट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर और कार्डिक सर्जन पर हुए हमले के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर मंगलवार को चौथे दिन भी प्रदेश भर में निजी अस्पताल बंद रहे।
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निजी चिकित्सालयों में मरीजों के फोन घनघनाते रहे कि अस्पताल कब खुलेंगे। हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों पर साफ दिखाई पड़ा। एसटीएच में ओपीडी में भारी भीड़ रही तो बेस में डायलिसिस के मरीज बढ़ गए।
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बृहस्पतिवार सुबह सेंट्रल हास्पिटल के डायरेक्टर रमेश शर्मा और कार्डिक सर्जन डा. प्रमोद जोशी से लोगों ने अभद्रता करने के साथ मारपीट की थी। मारपीट के विरोध में आईएमए के आह्वान पर शनिवार से डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। डाक्टरों ने आरोपियों की गिरफ्तारी को कैंडल मार्च निकाले।
निजी अस्पतालों में लगातार चार दिन से हड़ताल होने के कारण सुशीला तिवारी अस्पताल में मंगलवार को ओपीडी में 14 सौ मरीज पहुंचे। जबकि बेस अस्पताल में डायलिसिस पांच शिफ्ट में करनी पड़ी और मरीजों की संख्या 87 तक पहुंच गई। निजी चिकित्सालय में हड़ताल के कारण सरकारी अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है।
दूसरी ओर आईएमए के जनरल बाडी मीटिंग में बुधवार को भी हड़ताल पर रहने का निर्णय लिया गया। उधर, हाईकोर्ट ने एसएचओ हल्द्वानी को सेंट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डा. सुरेंद्र भुटियानी और जरूरत पड़ने पर अन्य को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष सेंट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डा. सुरेंद्र भुटियानी की याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिका में उन्होंने कहा था कि 17 दिसंबर 2015 को उनके अस्पताल के हार्ट सर्जन प्रमोद जोशी व अन्य के साथ भोला दत्त भट्ट, जया कर्नाटक और मृतक मरीज के पुत्र ने मारपीट की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि विपक्षीगण उन्हें धमका रहे हैं इसलिए उनके स्टाफ, अस्पताल की संपत्ति व खुद याचिकाकर्ता को सुरक्षा दी जाए। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सेंट्रल हस्पिटल के डायरेक्टर डा. सुरेंद्र भुटियानी और जरूरत पड़ने पर अन्य को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश एसएचओ हल्द्वानी को दिए हैं।
कोषागार कर्मचारी भी हड़ताल पर
कोषागार कर्मचारी आज से प्रदेश व्यापी हड़ताल पर हैं। इससे 17 कोषागार और 70 उप कोषागारों में काम पूरी तरह ठप रहेगा। मंगलवार को वित्त सचिव और निदेशक के साथ हुई वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलित कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड कोषागार कर्मचारी संगठन ग्रेड में संशोधन के शासनादेश की मांग को लेकर कई दिनों से आंदोलनरत है। कर्मचारियों की मंगलवार को शासन में वित्त सचिव एमसी जोशी और निदेशक कोषागार लक्ष्मी नारायण पंत के साथ वार्ता हुई। संगठन के प्रांतीय महामंत्री जगदीश कोली ने कोषागार कर्मचारी सहायक लेखाकार को ग्रेड पे 46 सौ एवं लेखाकार को ग्रेड पे 48 सौ का जीओ जारी करने की मांग की।
सचिव वित्त एमसी जोशी ने कहा कि शासन लेखाकार को 46 सौ ग्रेड पे देने को तैयार हैं। बाद में इसमें और बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन संगठन ने इसे मानने से इनकार कर दिया। संगठन के प्रांतीय महामंत्री ने कहा कि कर्मचारी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे प्रदेश की समस्त 17 कोषागार और 70 उप कोषागार में काम ठप रहेगा।
उन्होंने कहा कि इससे आम जनता और कर्मचारियों को जो परेशानी होगी उसकेलिए उत्तराखंड शासन और निदेशालय कोषागार के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। सचिवालय में हुई वार्ता में संयुक्त परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह, संगठन के अध्यक्ष बुद्धि प्रसाद जगूड़ी, प्रांतीय महामंत्री जगदीश कोली, संयोजक पीपी सैनी, सह संयोजक राजेंद्र पुंडीर, सह संयोजक वीरेंद्र सेमवाल, लेखाकार कौशल कुमार शामिल रहे।
यह काम होंगे प्रभावित
कोषागार कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंची तो प्रदेश के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन एवं पेंशन नहीं मिल पाएगी। भुगतान नहीं होने से विकास कार्य भी प्रभावित होंगे।
नहीं बन पाएंगे प्रमाण पत्र
कर्मचारियों की हड़ताल से सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों के पेंशन संबंधित जीवित प्रमाण पत्र भी नहीं बन पाएंगे। वहीं, प्रदेश में प्रतिदिन की भुगतान और आय का कार्य भी रुक जाएगा।
यह रहेंगे हड़ताल पर
प्रदेश के समस्त लेखा लिपिक, सहायक लेखाकार, लेखाकार, सहायक कोषाधिकारी एवं उप कोषाधिकारी हड़ताल पर रहेंगे।
पदों की कटौती के विरोध में भूख हड़ताल जारी
लोक निर्माण विभाग में ढांचा पुनर्गठन के विरोध में उत्तरांचल लोक निर्माण विभाग मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन के बैनर तले कर्मचारियों की भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। कर्मचारियों का कहना था कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तो 26 दिसंबर से वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उनका कहना था कि ढांचा पुनर्गठन से मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों के 157 पदों की कटौती हो गई है।
यमुना कालोनी स्थित धरना स्थल पर आयोजित सभा में प्रदेश महामंत्री सुनील कोठारी ने कहा कि मिनिस्ट्रीयलकर्मियों के पद निसंवर्गीय घोषित कर दिए गए हैं, जबकि इस संवर्ग के कर्मचारी पीएमजीएसवाई, एडीबी और वर्ल्ड बैंक में काम कर रहे हैं। अगर उन विभागों में कर्मचारियों की जरूरत नहीं है तो उन्हें लोक निर्माण विभाग में वापस कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने संवर्गीय पदों में की गई कटौती को तत्काल निरस्त किए जाने की मांग की।
इस मौके पर मुख्य अभियंता संवर्ग के अध्यक्ष एमएस पंवार, शैलेंद्र तिवारी, चंद्रमणी भट्ट, डीडी पांडेय, सोबरन सिंह रावत, डीसी ध्यानी, एमसी कांडपाल, डीडी कुकरेती, रमेश नौटियाल, मनोहर कुमार मिश्रा, रमेश जुयाल आदि रहे।