{"_id":"4aa92fe37b8c5a3716160d9a19a61e29","slug":"state-war-memorial-in-chidhbagh-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीड़बाग में बनेगा स्टेट वार मेमोरियल!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चीड़बाग में बनेगा स्टेट वार मेमोरियल!
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 14 Aug 2014 10:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सब कुछ ठीक रहा तो शहीदों की याद में प्रस्तावित स्टेट वार मेमोरियल चीड़बाग में बनेगा।
विज्ञापन
समिति की पहली पसंद चीड़बाग
पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल टीपीएस रावत (रिटायर) की अध्यक्षता वाली समिति ने बुधवार को पांच स्थलों का निरीक्षण कर उसमें तीन चिन्हित किए। समिति की पहली पसंद चीड़बाग ही है, हालांकि उसमें पेच है।
इसके अलावा समिति ने आईएचएम क्षेत्र और रिंग रोड जोगीवाला जगह भी दूसरी और तीसरी पसंद के तौर पर चिन्हित की है। स्टेट वार मेमोरियल निर्माण के लिए निर्माण के लिए गठित कमेटी ने भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
विज्ञापन
मेमोरियल निर्माण के लिए गठित कमेटी ने 7 अगस्त को बैठक कर पांच स्थान चिन्हित किए थे। इनमें गांधी पार्क, आईएचएम गढ़ी कैंट, रिंग रोड जोगीवाला, रेंजर कॉलेज और सेना की चीड़बाग में स्थित भूमि शामिल थी।
विज्ञापन
समिति ने मौके पर जाकर बुधवार को निरीक्षण किया। गांधी पार्क और रेंजर कॉलेज को कम भूमि उपलब्धता के कारण कमेटी ने नामंजूर कर दिया। समिति की प्राथमिकता सेना की चीड़बाग स्थिति भूमि है।
भूमि के हस्तांतरण संबंधी प्रक्रिया शुरू करेंगे DM
गढ़ी कैंट स्थिति आईएचएम और जोगीवाला दूसरी और तीसरी प्राथमिकता में हैं। समिति अब इन तीनों स्थलों का प्रस्ताव सरकार को भेजेगी, जिसके बाद जिलाधिकारी भूमि के हस्तांतरण संबंधी प्रक्रिया शुरू करेंगे।
निरीक्षण में कमेटी सदस्य ब्रिगेडियर केजी बहल (रिटायर), ब्रिगेडियर आरएस रावत (रिटायर), लेफ्टिनेंट कर्नल गंगा सिंह रावत (रिटायर) और पीटीआर शमशेर सिंह बिष्ट (रिटायर) और सचिव कर्नल अमिताभ नेगी (रिटायर) मौजूद रहे।
पहले भी चीड़बाग ही था पसंद
2010 में स्टेट वार मेमोरियल की प्रस्ताव जब तैयार हुआ था तो सरकार का एकमात्र पसंदीदा स्थल चीड़बाग रखा गया।
यह भूमि सेना की ए-1 श्रेणी की है, जिसके अन्यत्र उपयोग की अनुमति मिल पाने के लिए रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेनी होती है।
इसकी प्रक्रिया जटिल और लंबी है। जिसके चलते पुराना प्रस्ताव लटक गया था। दोबारा उन्हीं प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।