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जंगलों की हिफाजत करेगी विशेष टीमें
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 14 May 2014 02:23 PM IST
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वन संपदा और वन्य जीवों की हिफाजत के लिए नई योजना अमल में लाई जा रही है।
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ग्रामीणों और रिटायर्ड वन कर्मियों की संयुक्त टीमें तैयार
वन महकमे ने पहली बार स्थानीय ग्रामीणों और रिटायर्ड वन कर्मियों की संयुक्त टीमें तैयार की हैं, जो विभाग के खर्च पर जंगलों और वन्य जीवों की हिफाजत करेंगी।
लगातार सामने आ रही पेड़ों के कटान और वन्य जीव अंगों की तस्करी की घटनाओं के मद्देनजर वन महकमे ने नया प्लान लागू कर दिया है।
प्रदेश की हर डिवीजन में 35 सदस्यीय पेट्रोलिंग टीमें बनाई गई हैं। इनमें 20 रिटायर्ड वनकर्मी और 15 स्थानीय ग्रामीण हैं। इस टीम को न केवल पेट्रोलिंग का खर्च दिया जाएगा बल्कि संसाधन और वेतन भी मिलेगा।
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पेट्रोलिंग टीम में डलेगी नई जान
स्थानीय ग्रामीणों की सहायता से पेट्रोलिंग टीम, जंगलों में गश्त बढ़ाएगी। प्रमुख वन संरक्षक एसएस शर्मा ने बताया कि स्थानीय लोग पेट्रोलिंग टीम में नई जान डालेंगे तो पूर्व वनकर्मी इसे मजबूती देंगे।
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कोई अनहोनी होने पर अनुभवी पूर्व कर्मचारी परिस्थितियों पर काबू पाने में सक्षम हैं। गौरतलब है कि अभी तक पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी हर डिवीजन की होती थी।
लेकिन, क्षेत्र बड़ा होने के कारण यह व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो पा रही थी। विशेष टीमों का फोकस केवल पेट्रोलिंग ही रहेगा।
यह होगा फायदा
पेट्रोलिंग दस्तों का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि शिकारियों और सौदागरों पर पैनी निगाह रखी जा सकेगी। इसके अलावा जंगलों में आग या पेड़ों के कटान के मामले में भी तुरंत कार्रवाई हो सकेगी।
यह टीम अपनी डिवीजन को रिपोर्ट करेगी। डिवीजन से हर दिन की रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय को भेजी जाएगी।
यह ऐसी पेट्रोलिंग टीमें हैं जो कि स्थानीय परिस्थितियों में ढलकर काम करेंगी। हमारा मकसद वनों और वन्य जीवों को पूरी सुरक्षा उपलब्ध कराना है। अभी तक पेट्रोलिंग के लिए अलग से कोई बजट नहीं था। हमने अब इस योजना के लिए अलग से पेट्रोलिंग बजट दिया है।
- एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक