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स्पीकर के फैसले से भाजपा मुश्किल में, बिगड़ता दिख रहा खेल
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 03 May 2016 03:09 AM IST
सार
- भीमलाल की सदस्यता बचने से बढ़ा कांग्रेस का एक वोट
- अब भाजपा और कांग्रेस के हुए बराबर विधायक
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मदन कौशिक ने याचिका दायर कर सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।
- फोटो : file photo
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विस्तार
भाजपा के निलंबित विधायक भीमलाल आर्य को लेकर स्पीकर के फैसले ने भाजपा की मुसीबत बढ़ा दी है। एक-एक सदस्य की लड़ाई लड़ रही भाजपा को इस तरह के फैसले की उम्मीद नहीं थी। स्पीकर के निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि यदि हरीश रावत को बहुमत परीक्षण का मौका मिला तो वह उनके में मत देंगे। क्योंकि भाजपा ने तो उनकी सदस्यता निरस्त करने की याचिका स्पीकर के समक्ष दाखिल की थी।
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भाजपा के सरकार बनाने का खेल लगातार बिगड़ता जा रहा है। वैधानिक रूप से भले ही सदन में उसके 28 विधायक हो, लेकिन व्यवहारिक तौर पर संख्या बल के लिहाज से भाजपा भी अब कांग्रेस के बराबर 27 के आंकड़े पर आ गई है।
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सदस्यता बचने से भाजपा का गणित कमजोर
स्पीकर यदि सोमवार को भीमलाल की सदस्यता निरस्त भी कर देते तो भी भाजपा के लिए राहत भरी बात होती, लेकिन आर्य की सदस्यता बरकरार रहने का मतलब भाजपा का एक वोट कम हो जाना नहीं बल्कि कांग्रेस का एक वोट बढ़ जाना है। क्योंकि ऐसा होने की संभावना नहीं के बराबर है कि भीमलाल भाजपा को वोट देंगे, क्योंकि भाजपा तो भीमलाल की सदस्यता निरस्त कराने के लिए स्पीकर के दरवाजे पर गई थी।
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सदस्यता तो नहीं गई, लेकिन भाजपा का गणित बिगड़ गया। इस बात की पूरी संभावना है कि मौका मिलने पर भीमलाल अपनी पार्टी के व्हिप को नहीं मानेंगे और हरीश रावत के पक्ष में वोट करेंगे।
इनका है कहना
मीडिया की खबरें और क्लीपिंग देखने मात्र से ही स्पीकर ने कांग्रेस के नौ विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी और भीमलाल के प्रति सहानुभूति रखी। इसलिए यह निर्णय असंवैधानिक है। पार्टी इसे कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रही है।
-मदन कौशिक, मुख्य सचेतक, भाजपा विधानमंडल दल