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वोटों की बस्ती में कौन बनेगा ‘महानेता’?
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Feb 2015 08:30 AM IST
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उत्तराखंड की मलिन बस्ती के लोगों को मालिकाना हक दिलाने की लड़ाई में प्रदेश कांग्रेस के दो नेता आमने-सामने हैं।
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वोटों के लिहाज से खासी अहमियत रखने वाली मलिन बस्तियों के लोगों को लुभाने में दोनों ही नेता पीछे नहीं रहना चाहते। यही वजह है कि वोटों की बस्ती पर हस्ती की लड़ाई चरम पर है। बुधवार को कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना की गरीब रैली है।
वहीं, मलिन बस्तियों पर रिपोर्ट देने वाली समिति का अध्यक्ष होने के नाते विधायक राजकुमार ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। राजकुमार को मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिन बाद ही हरीश रावत ने यह जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हें पांच माह में रिपोर्ट सौंपनी थी, जिसके चार माह निकल चुके हैं।
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राजकुमार की मलिन बस्तियों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है। वहीं, धस्माना मलिन बस्तियों में अपनी सक्रियता बढ़ाकर पार्टी में कद तो बढ़ाना ही चाहते हैं उनकी निगाह शहर के मेयर पद पर भी है। कौन कितना कामयाब होगा यह तो समय ही बताएगा।
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मालिकाना हक दिलाने का मामला
मलिन बस्तियों का ‘महानेता’ बनने के चक्कर में नेताओं ने ऐसी बिसातें बिछा दी हैं कि यदि सरकार इन बस्तियों को मालिकाना हक दे भी देती है तब भी पेंच फंसे रहेंगे।
मसलन, मालिकाना हक मिलने पर क्या व्यक्ति अपना मकान बेच पाएगा? इस मसले पर संसदीय सचिव आवास राजकुमार और प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना की अलग अलग राय है। राजकुमार जहां मकान बेचने का हक देने के पक्ष में नहीं हैं, वहीं धस्माना चाहते हैं यह अधिकार भी मलिन बस्ती वालों को दिया जाए।
बता दें कि संसदीय सचिव राजकुमार और कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना खुद को मलिन बस्तियों का ‘महानेता’ साबित करना चाहते हैं। दोनों चाहते हैं कि जब सरकार मलिन बस्तियों को मालिकाना हक देने का ऐलान करे तो श्रेय उनकी झोली में जाए।
दोनों का दावा है कि मलिन बस्तियों को हक दिलाने के लिए उन्होंने ही पहले विजय बहुगुणा और अब हरीश रावत को तैयार किया है। मगर मालिकाना हक के बाद संपत्ति बिक्री पर दोनों में मतभेद हैं। राजकुमार का कहना है कि मालिकाना हक मिलने पर कोई घर बेच नहीं पाएगा। जबकि धस्माना कह रहे हैं कि जब व्यक्ति सर्किल रेट के लिहाज से पैसा देगा तो घर बेच सकता है।
मलिन बस्तियों की सियासी हैसियत
हर नेता चाहता है कि उसका मलिन बस्तियों में दखल हो। चुनाव में मलिन बस्तियों का अहम रोल होता है। नेताओं को इन बस्तियों से दरी बिछाने, बैनर, पोस्टर लगाने वाले कार्यकर्ता मिलते हैं। बहुत से दल यहां के लोगों को झगड़ों में भी इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा नेताओं की सभाओं और रैलियों में यहां के लोगों का भीड़ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
523 मलिन बस्तियां प्रदेश में पंजीकृत हैं साल 2010 के सर्वे के अनुसार।
123 मलिन बस्तियां देहरादून में पंजीकृत हैं साल 2010 के सर्वे के अनुसार।
1500 छोटी-बड़ी मलिन बस्तियां हो सकती हैं प्रदेश में एक अनुमान के मुताबिक।
223 छोटी बड़ी मलिन बस्तियां हो सकती है देहरादून में एक अनुमान के मुताबिक।
धस्माना के निशाने पर रहेंगे मेयर
उत्तराखंड मलिन बस्ती विकास परिषद के बैनर तले बुधवार को सुबह 11 बजे परेड ग्राउंड से गरीब रैली निकाली जाएगी। वैसे तो रैली मलिन बस्तियों में रहने वालों को मालिकाना हक दिलाने के लिए है, लेकिन इसका सीधा निशाना मेयर विनोद चमोली पर है। रैली के अगुवा वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि रैली सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि उसके फैसले के पक्ष में है।
मंगलवार को सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि रैली परेड मैदान से नगर निगम तक जाएगी। इस संबंध में वह मुख्यमंत्री हरीश रावत से वार्ता कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने उन्हें शाबाशी दी है। सरकार इस संबंध में पहले ही फैसला ले चुकी है।
इसके बाद धस्माना ने मेयर विनोद चमोली की गलतियां गिनाईं। बोले कि यहां अब कोई छोटा नेता तो रहा नहीं, चुहिया मरे तो नेता सीधे मुख्यमंत्री के पास दौड़ते हैं। धस्माना ने कहा कि मौलिक सवाल कोई नहीं उठाता। गांधी पार्क की रेलिंग, गलियों की नालियां, श्मशान घाटों का रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर निगम की है।
ओएनजीसी और हुडको काम करने को तैयार हैं, लेकिन मेयर चाहते हैं कि पैसा नगर निगम में आए। आरोप लगाया कि नगर निगम में पैसा आने से कमीशनखोरी होगी। कहा कि मलिन बस्तियों पर जब तक मालिकाना हक पर फैसला नहीं होता निगम या कोई भी एजेंसी मलिन बस्तियों में ध्वस्तीकरण न करे।