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Dehradun News: फेसबुक पर शेयर किया चाइल्ड पोर्नोग्राफी का वीडियो
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सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री साझा करने के मामले में पटेलनगर पुलिस ने कुलदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। कार्रवाई गृह मंत्रालय के अधीन संचालित नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) से प्राप्त शिकायत के आधार पर की गई।
थाना प्रभारी विनोद गुसाईं ने बताया कि एनसीआरपी से शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें फेसबुक पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित वीडियो साझा किए जाने की जानकारी दी गई। जांच में संबंधित आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर के आधार पर आरोपी की पहचान कुलदीप निवासी वार्ड-43 पटेलनगर के रूप में हुई। पटेलनगर पुलिस ने टिपलाइन पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। जांच के दौरान एक फोटो और छह वीडियो फोल्डर मिले। इनमें से कई वीडियो खुलने पर उनमें करीब पांच से छह वर्ष की एक बालिका के साथ अश्लील दृश्य दिखाई दिए। पुलिस ने सभी डिजिटल फाइलों की जांच की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट से उक्त सामग्री साझा की गई थी।
पुलिस का कहना है कि बाल यौन शोषण सामग्री का प्रसारण और साझा करना गंभीर अपराध है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपत्तिजनक सामग्री किस स्रोत से प्राप्त हुई और इसे कितने लोगों तक साझा किया गया।
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थाना प्रभारी विनोद गुसाईं ने बताया कि एनसीआरपी से शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें फेसबुक पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित वीडियो साझा किए जाने की जानकारी दी गई। जांच में संबंधित आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर के आधार पर आरोपी की पहचान कुलदीप निवासी वार्ड-43 पटेलनगर के रूप में हुई। पटेलनगर पुलिस ने टिपलाइन पोर्टल पर उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। जांच के दौरान एक फोटो और छह वीडियो फोल्डर मिले। इनमें से कई वीडियो खुलने पर उनमें करीब पांच से छह वर्ष की एक बालिका के साथ अश्लील दृश्य दिखाई दिए। पुलिस ने सभी डिजिटल फाइलों की जांच की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट से उक्त सामग्री साझा की गई थी।
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पुलिस का कहना है कि बाल यौन शोषण सामग्री का प्रसारण और साझा करना गंभीर अपराध है। इस मामले में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपत्तिजनक सामग्री किस स्रोत से प्राप्त हुई और इसे कितने लोगों तक साझा किया गया।
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