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भारत में घुसपैठ की फिराक में चीन, सीमा पर बढ़ी चौकसी

Wed, 05 Jul 2017 08:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गोपेश्वर
ब्यूरो/अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Wed, 05 Jul 2017 08:54 AM IST
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security alert on indo China border at chamoli uttarakhand

देश की पूर्वोत्तर सीमा में सड़क विवाद पर भारत-चीन के बीच बढ़ी तल्खी से ही चीन बार बार भारत में घुसपैठ की कोश‌िश कर रहा है। इसके चलते बॉर्डर पर स‌िक्योर‌िटी बढ़ा दी गई है।

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उत्तराखंड के चमोली जिले से लगी चीन सीमा क्षेत्र में भी आईटीबीपी और सेना ने भी चौकसी बढ़ा दी है। सीमा क्षेत्र में आईटीबीपी और सेना के जवान मुस्तैद हैं। हालांकि सीमा क्षेत्र में सब कुछ सामान्य है। 
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चमोली से लगी चीन सीमा पर चीन की ओर से कई बार नो मेंस लैंड बाड़ाहोती में घुसपैठ की जा चुकी है। इसी वर्ष तीन जून को बाड़ाहोती में चीन की ओर से आए दो हेलीकॉप्टर करीब तीन मिनट तक आसमान में मंडराते रहे, जिससे खुफिया एजेंसी सतर्क हो गई और सीमा क्षेत्र में भी चौकसी बढ़ा दी गई।
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इससे पहले भी चीन की ओर से बाड़ाहोती में घुसपैठ की जाती रही है। वर्ष 2014 की 19 जुलाई को चीन की ओर से बाड़ाहोती क्षेत्र में सफेद और काले घोड़ों में सवार 16 चीनी सैनिकों ने यहां भारतीय चरवाहों के टेंट फाड़ दिए थे, जबकि वर्ष 2015 में चीनी सैनिकों की ओर से भारतीय चरवाहों के खाद्यान्न को नष्ट कर दिया गया था।

बाड़ाहोती में बार-बार घुसपैठ करता है चीन

security alert on indo China border at chamoli uttarakhand

वर्ष 2016 में सीमा क्षेत्र के निरीक्षण पर गई चमोली प्रशासन की टीम का भी चीनी सैनिकों से सामना हुआ था। बाड़ाहोती क्षेत्र के निरीक्षण के लिए प्रतिवर्ष चार बार जिला प्रशासन की टीम आईटीबीपी की अंतिम चौकी तक पहुंचती है। बाड़ाहोती क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद टीप लौटती है।

वर्ष 1959 में चीन ने उत्तराखंड से लगी सीमा पर अपनी दस्तक देनी शुरू कर दी थी। इसका प्रतिफल यह हुआ कि वर्ष 1962 में भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ, जिससे भारत-तिब्बत व्यापार पूर्ण रूप से बंद हो गया।

युद्ध से पहले भारत और तिब्बत व्यापार की सबसे बड़ी मंडी बाड़ाहोती ही थी। इस स्थान को भी चीन अपनी सीमा बताने का हमेशा प्रयास करता है। बाड़ाहोती बुग्याल करीब 10 किमी से अधिक है।

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