केदारनाथ में नर कंकालों का सर्च ऑपरेशन आज से
केदारनाथ घाटी में नरकंकालों और अवशेषों को खोजने का जिम्मा एसडीआरएफ को सौंपा गया है। शुक्रवार से 85 जवान सात ट्रेकिंग रूटों पर सर्च ऑपरेशन शुरू करेंगे।
पहला ऑपरेशन 21 से लेकर 25 अक्तूबर तक और दूसरा ऑपरेशन तीन से पांच नवंबर के बीच चलेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि यदि इस दौरान कोई कंकाल मिलता है तो उनका डीएनए सैंपल सुरक्षित कराने के साथ ही पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया जाए।
आपदा के तीन साल बाद भी केदारघाटी में 31 नरकंकाल मिलने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच घाटी में अभी और कंकाल और इंसानी अवशेष होने की आशंका है। ऐसे में सरकार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है। इसलिए घाटी के ट्रेकिंग रूटों पर नए सिरे से सर्च ऑपरेशन कराने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने की सर्च ऑपरेशन की समीक्षा
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बृहस्पतिवार को डीजीपी एमए गणपति, आईजी संजय गुंज्याल और एसडीआरफ के सेनानायक जगत राम जोशी और अन्य अधिकारियों के साथ सर्च ऑपरेशन की समीक्षा की।
उन्होंने बताया कि स्थानीय भौगोलिक परिवेश की जानकारी व पर्वतीय क्षेत्र में ट्रैकिंग में निपुणता होने के कारण माटा से 26, 27 व 28 अक्टूबर को स्थानीय लोगों के सहयोग से इन रूटों पर कॉम्बिंग करने का अनुरोध किया जाएगा।
इस दौरान एसडीआरएफ की रॉफ्टिंग टीम द्वारा नदी के किनारों पर सर्च ऑपरेशन संचालित किया जाएगा। दीपावली बाद नवंबर माह में एक बार फिर एसडीआरएफ द्वारा केदारघाटी के विभिन्न क्षेत्रों में सघन काम्बिंग की जाएगी।
इन इलाकों में चलेगा सर्च ऑपरेशन
मुख्यमंत्री ने बताया कि सर्च ऑपरेशन गरुड़चट्टी, देवविष्णु, गोमकारा, गौरीगां, चैमासी, खाम, रामबाड़ा, केदारनाथ, केदारनाथ, चैराबाड़ी ग्लेशियर के साथ कालीशिला, चैमासी, लिनचैली, केदारनाथ, वासुकीताल, खतलिंग आदि को शामिल किया गया है।
सर्च ऑपरेशन में एसडीआरएफ के 87 जवान शामिल किए गए हैं। इनकी सात टीमें गठित की गई हैं जो टीम उप सेनानायक प्रकाश आर्य की अगुवाई में शुक्रवार सुबह रवाना होंगी।