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‘50+’ अफसर रहें सतर्क, हो सकती है हमेशा की छुट्टी

Fri, 24 Apr 2015 07:37 PM IST
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 24 Apr 2015 07:37 PM IST
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scrutiny of 50 plus officers.

मोटी तनख्वाह लेने के बावजूद काम धेले का भी नहीं करने वाले 50 साल से अधिक उम्र के अधिकारियों पर पेयजल निगम सख्त हो गया है। अधिकारियों की उपयोगिता परखने के लिए जल्द ही स्क्रीनिंग कमेटी गठित की जाएगी।

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कमेटी उनकी पूरी उम्र का कामकाज तो देखेगी ही लेकिन विशेष जोर पिछले सालों के कार्यों पर होगा। उसके आधार पर ही रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

निगम परखेगा उपयोगिता
एक ओर पेयजल निगम में वेतन के लाले पड़े हैं तो वहीं कनिष्ठ अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक का वेतन 70 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक है। अब पेयजल निगम के मुख्य महाप्रबंधक (एमडी) की ओर से जांच शुरू कराई जा रही है। वर्ष 2002 का शासनादेश पूरी तरह से लागू होगा।
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स्क्रीनिंग कमेटी 50 वर्ष से अधिक आयु के अधिकारियों का कार्य बारीकी से देखेगी। हालांकि किसी भी अधिकारी के अंतिम पांच साल अधिक मायने रखेंगे। कार्यों के रिकार्ड के आधार पर उनका आकलन किया जाएगा। यदि किसी अधिकारी की कोई उपादेयता नजर नहीं आएगी तो उसे बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।
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संख्या घटाएगा निगम
पेयजल निगम के एमडी भजन सिंह ने बताया कि कई अधिकारी वर्षभर सिर्फ छुट्टी ही लेते रहते हैं तो कई काम ही नहीं करना चाहते। ऐसे में जो अधिकारी मेहनत के साथ काम कर रहे हैं, वह भी काम से जी चुराने लगे हैं। निगम पहले ही घाटे में है। अधिकारियों की संख्या घटाकर कार्य करने वालों को समय से वेतन दिया जा सकेगा।

यह है शासनादेश
वर्ष 2002 के शासनादेश के अनुसार जो सरकारी सेवक राजकीय सेवा के लिए दक्ष नहीं हैं, जिनकी आयु 50 वर्ष या उससे अधिक हो गई है। ऐसे सरकारी सेवकों को वर्षवार स्क्रीनिंग कमेटी गठित कर कार्रवाई न किए जाने के परिणामस्वरूप सेवा में बनाए रखना जनहित में उचित नही है।


काम के सिर्फ 11 दिन
यदि निगम में सीएल, एमएल, ईएल का हिसाब लगाया जाए तो वर्षभर में छुट्टियां ही छुट्टियां हैं। यहां काम से सिर्फ 11 ही दिन निकलते हैं। यही नहीं एक अधिकारी तो पिछले 6 महीनों से छुट्टी पर हैं। पेयजल निगम के एमडी का कहना है कि ऐसे में यदि अधिकारियों पर शिकंजा नहीं कसा गया तो यहां काम न करने वाले अधिकारियों की फौज खड़ी हो जाएगी।

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