दुनिया जिससे थी अनजान, हिमालय में वैज्ञानिकों ने खोज निकाले उन वनस्पतियों के पांच वंश और 65 जातियां
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भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने हिमालय में वनस्पतियों के पांच वंश और 65 ऐसी जातियों की खोज की है, जिससे आज तक पूरी दुनिया अनजान थीं। इनकी खोज से जुड़ी यह जानकारियां कई अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। इससे यह फायदा होगा कि पूरी दुनिया में इन वनस्पतियों का संरक्षण किया जा सकेगा।
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण उत्तरी क्षेत्र के कार्यालय प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने बताया कि उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में हिमालयी क्षेत्रों में गहन अध्ययन किया गया। उसके बाद वनस्पतियों के पांच वंश और 65 जातियों की खोज की गई।
आज तक वनस्पति की दुनिया के वैज्ञानिक इन वंश और जातियों से अनजान थे। वैज्ञानिकों ने इन क्षेत्रों से शिवपरवतिया, हिमगिरिया, साइजोटेक्नीयिम, देवेंद्री, सिंबिडियोपसिस नाम के वनस्पतियों के वंश खोजे हैं।
वर्ष 1890 से हो रही है वनस्पतियों की खोज
वर्ष 2017 में वैज्ञानिकों ने पांच राज्यों में 215 वनस्पतियों की खोज की है। इसमें उत्तराखंड में 65, केरल में 66, सिक्किम में 33, पश्चिमी बंगाल में 27 और तमिलनाडु में 24 जातियां शामिल हैं।
बीएसआई के देहरादून कार्यालय प्रमुख डॉ. एसके सिंह ने बताया कि संस्थान की स्थापना वर्ष 1890 में पश्चिमी बंगाल से की गई थी। इससे पहले इस संस्थान का नाम रॉयल बॉटनिकल गार्डन था।
आजादी के बाद वर्ष 1954 में इसका नाम बदलकर भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया) रख दिया गया। संस्थान के वैज्ञानिक लुप्तप्राय: प्रजातियों के संरक्षण, पहचान के लिए काम कर रहे हैं।
आजादी के बाद संस्थान के प्रमुख वन सर्वेक्षण अभियान
वायुसेना का पश्चिमी हिमालयी अभियान-1959
भारत सेवियत अभियान-1960
नीलकंठ अभियान-1962
फूलों की घाटी-हेमकुंड अभियान- 1962
रूपकुंड अभियान-1965
त्रिशूल अभियान-1965
केदारनाथ गुंबद अभियान-1967
नंदा देवी वैज्ञानिक एवं पारिस्थितिकी अभियान-1993
उत्तर की सिक्किम पर हूकर के पदचिन्ह-1994
लद्दाख का हाईमैक्स अभियान-1995
अंटार्कटिका पर 16वां भारतीय विज्ञान अभियान-1996
अंटार्कटिका पर 17वां भारतीय विज्ञान अभियान-1997
अंटार्कटिका पर 18वां भारतीय विज्ञान अभियान-1998
पंचाचूली बहुआयामी अभियान- 1998
मिहाओ वन्य जीव अभयारण्य अभियान-2000
(इसके अलावा जम्मू कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब सहित कई राज्यों में संस्थान के वैज्ञानिक लगातार सर्वेक्षण कर रहे हैं।)