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यहां का स्वास्थ्य विभाग है घोटालों का विभाग
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 29 Jun 2015 03:35 PM IST
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स्वास्थ्य विभाग पिछले कुछ महीनों से घपले घोटालों को लेकर चर्चा में है। लगातार नए और पुराने घोटाले खुल रहे हैं। इससे स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी भी चिंतित नजर आ रहे हैं। रविवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि विभाग के कामों की तारीफ कम और बदनामी अधिक हो रही है।
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स्वास्थ्य विभाग में सामने आए घपलों की फेहरिस्त
घपला एक : पिछले साल संविदा पर एएनएम की भर्ती में घपला सामने आया। इसमें तत्कालीन सीएमओ डा. गुरपाल सिंह और प्रशासनिक अधिकारी सुशील जोशी को निलंबित किया जा चुका है। दोनों पर कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज है।
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घपला दो : सीएमओ दफ्तर में बेरोजगार युवकों से चतुर्थ श्रेणी में भर्ती के नाम पर मोटी रकम वसूलने का मामला सामने आ चुका है।
घपला तीन : जिला योजना समिति से सीएमओ दफ्तर को अस्पतालों, दफ्तरों की साज सज्जा और उपकरण खरीद के लिए मिले 2.90 करोड़ रुपये के आवंटन में अनियमितता।
घपला चार : मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के कार्ड बनाने में भी गड़बड़ी हुई। मोटी तनख्वाह पाने वाले कई डाक्टरों, इंजीनियरों और पुलिस वालों समेत योजना के कई अपात्रों के कार्ड भी बना दिए गए।
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घपला पांच : वर्ष 2010-13 तक संविदा पर नियम विरुद्ध स्टाफ नर्स और एएनम (आक्जीलरी नर्सिंग मिडवाइफरी) की भर्तियों के घपले का आठ जून को खुलासा हुआ। इसमें पैसों के लेनदेन के आरोप भी हैं।
घपला छह : दून अस्पताल में मरीजों को डाक्टर लगातार महंगी ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। कार्रवाई न होने से स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के निर्देशों का भी पालन नहीं हो रहा है। मंत्री के छापे में ब्रांडेड दवाएं लिखी पकड़ी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सर्जन डा. अंशिका अरोड़ा से अस्पताल प्रशासन ने 125 रुपये की रिकवरी के आदेश दिए हैं।
घपला सात : अगले महीने सीएमओ दफ्तर से होने वाले करोड़ों रुपये के टेंडर की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि चहेते को टेंडर दिलाने के लिए बार-बार शर्तें बदली जा रही हैं।