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राजाजी नेशनल पार्क में चल रहा 'जंगलराज'
प्रेम प्रताप सिंह/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Dec 2013 01:19 PM IST
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उत्तराखंड का राजाजी नेशनल पार्क पर्यटकों से गुलजार रहने की जगह अनियमितताओं व घोटालों से गुलजार हो गया है।
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पार्क में हाथियों के चारा घोटाले का मामला थमा भी नहीं था कि फारेस्ट गार्डों की भर्ती में धांधली का खेल भी उजागर हो गया। पार्क प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर कई चहेतों को फॉरेस्ट गार्ड की तैनाती दे दी।
महकमे में हड़कंप
प्रमुख वन संरक्षक डॉ. आरबीएस रावत ने मामले की जांच बैठा दी है। भर्ती में धांधली को लेकर महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। पार्क के उप निदेशक एचके सिंह की ओर से चार अक्टूबर 2013 को 28 फारेस्ट गार्डों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए थे।
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इस बीच नियुक्तियों में धांधली का खुलासा हो गया। इनमें से केएल भट्ट पुत्र सोम लाल भट्ट की आयु 15 जनवरी 1992 और कुलदीप पुत्र श्री प्रकाश की उम्र 10 जुलाई 1990 दर्शायी गई है।
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नियम के अनुसार पार्क की परीक्षा में केवल वे ही दैनिक वेतनभोगी बैठ सकते थे जिनकी सेवा अवधि तीन साल से अधिक हो चुकी हो। कुलदीप की आयु 21 साल भी नहीं पूरी हो पाई है। ऐसे में यह नियुक्ति संदेह के घेरे में आ गई।
कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक
सवाल उठता है कि उसने तीन साल वन विभाग में सेवाएं कैसे दीं। दूसरा पक्ष यह रहा कि सरकार ने जब छह मार्च 2002 से ही दैनिक वेतन कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक लगा रखी है तो दोनों कर्मचारियों को किस आधार पर दैनिक वेतन के आधार पर रख लिया गया।
इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए अपर प्रमुख वन संरक्षक मानव संसाधन डीबीएस खाती ने पार्क के निदेशक एसपी सुबुद्धि से जवाब तलब किया था। इस मामले में अभी तक पार्क प्रशासन की ओर से कोई जवाब नहीं भेजा गया है।
सूत्रों ने बताया कि पार्क के एक अधिकारी ने अपने घर काम करने वाले कर्मचारी तक को फारेस्ट गार्ड बना दिया है।
मैंने इस प्रकरण की जांच अपर प्रमुख वन संरक्षक मानव संसाधन को सौंपी थी लेकिन वह अवकाश पर चले गए। ऐसे में यह जांच अब मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव धनंजय मोहन को सौंपी जा रही है। जांच में पूरा सच सामने आ जाएगा।
- डॉ. आरबीएस रावत, प्रमुख वन संरक्षक