{"_id":"575939ec4f1c1bca389c5aaa","slug":"saurabh-rawat-selected-for-under-19-cricket-camp","type":"story","status":"publish","title_hn":"हल्द्वानी के सौरभ का अंडर-19 क्रिकेट कैंप के लिए चयन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हल्द्वानी के सौरभ का अंडर-19 क्रिकेट कैंप के लिए चयन
हिमांशु जोशी / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 09 Jun 2016 03:14 PM IST
विज्ञापन
सौरभ रावत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी के सौरभ रावत का चयन नेशनल क्रिकेट एकेडमी (एनसीए) बंगलूरू में लगने वाले अंडर-19 कैंप के लिए हुआ है।
विज्ञापन
एनसीए में इन खिलाड़ियों को एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बीसीसीआई ने बुधवार को बंगलूरू में इन नामों की घोषणा की। बीसीसीआई बृहस्पतिवार तक अंडर-16 कैंप के लिए चयनित खिलाड़ियों के नामों की घोषणा कर सकता है। उम्मीद है कि इस सूची में हल्द्वानी के आर्यन जुयाल और देहरादून के आर्यन शर्मा का नाम भी हो।
हल्द्वानी क्रिकेटर्स क्लब के मेंबर रहे सौरभ रावत वर्तमान में उड़ीसा की अंडर-19 क्रिकेट टीम में विकेट कीपर हैं। बुधवार को बंगलूरू में बीसीसीआई की बैठक के बाद एनसीए में लगने वाले अंडर-19 खिलाड़ियों के एक माह के प्रशिक्षण कैंप के लिए खिलाड़ियों का चयन किया गया।
विज्ञापन
कैंप में खिलाड़ियों को एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण 15 जून से 14 जुलाई तक चलेगा। बातचीत में सौरभ ने बताया कि ‘इस कैंप में चयनित होना, मेरे लिए गर्व की बात है। मैं अपने सभी प्रशिक्षकों और खिलाड़ियों को धन्यवाद देता हूं, जिन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।’ इस कैंप के जरिये मैं कोशिश करूंगा कि प्रशिक्षकों से बेहतरीन क्रिकेट के गुर सीख सकूं।
विज्ञापन
यदि उत्तराखंड को होती मान्यता
यदि उत्तराखंड की एसोसिएशन को बीसीसीआई से मान्यता मिल गई होती तो आज सौरभ रावत का चयन उड़ीसा से नहीं होता। वह अपने राज्य की क्रिकेट टीम से खेल रहा होता।
इसके अलावा उत्तराखंड के कई ऐसे खिलाड़ी हैं, जो राज्य की एसोसिएशन को मान्यता न मिल पाने के कारण अन्य राज्यों की तरफ से खेल रहे हैं। एसोसिएशनों की आपसी लड़ाई में राज्य के कई खिलाड़ी या तो अन्य स्टेट से खेल रहे हैं, या फिर क्रिकेट को अलविदा कहने को मजबूर हैं।