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सैन्य सम्मेलन 2019: ये जांबाज करेंगे मंथन, सुबह से शाम तक होंगे चार सत्र

Mon, 04 Nov 2019 11:10 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 04 Nov 2019 11:10 AM IST
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Sainya shakti conclave in Dehradun speaker and session name
सम्मेलन में मुख्यमंत्री व अन्य अतिथि - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड में हर घर तक सेना की पहुंच है। यहां हर घर फौजी की कहावत यूं ही नहीं है। इसके पीछे छिपा है लाखों जांबाजों का समर्पण। उनकी बहादुरी। पीढ़ी दर पीढ़ी सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाने का उत्साह। आज इसी साहस, वीरता और उत्साह को सलाम करने के लिए देशभर से सैन्य अफसर और विशेषज्ञ दून में एकजुट हो रहे हैं। यह एकजुटता दिखाई देगी उत्तराखंड सरकार और अमर उजाला के सैन्य सम्मेलन में।

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इस सम्मेलन में सुबह से शाम तक सेवारत और पूर्व सैनिकों से जुड़े हर पहलू पर मंथन होगा। शाम को कवि कुमार विश्वास अपनी वीर रस से भरपूर कविताओं से समां बांधेंगे। देश और राज्य की अनेक अनुभवी हस्तियां अलग-अलग सत्रों में इनसे जुड़े मुद्दों पर समाधान सुझाएंगी। मंथन में आ न पाएं तो कोई बात नहीं। अखबार में पूरा ब्योरा आएगा। बस पढ़ते रहिए अमर उजाला .....। 
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प्रथम सत्र: राष्ट्रीय सुरक्षा: चुनौतियों के बदलते आयाम 
मॉडरेटर- विनोद अग्निहोत्री, सलाहकार संपादक, अमर उजाला 

मुख्य वक्ता:- लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) एएस लांबा, पूर्व वाइस आर्मी चीफ: ले. ज. एएस लांबा को आंतरिक व बाह्य सुरक्षा का रणनीतिकार माना जाता है। उन्होंने 1971 में भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे वर्तमान में इंडियन एंड इंटरनेशनल फोरम फॉर स्ट्रेटेजिक एंड सिक्यूरिटी इनिशिएटीव, डिफेंस एनालेसिस और ट्र्रैक टू डायलॉग से जुड़े हुए हैं। उन्हें सेवा के दौरान कई परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजा जा चुका है। 
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लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) ओपी कौशिक : ले.ज. ओपी कौशिक भारतीय सैन्य अकादमी से 1959 में पाउसआउट हुए थे। वह सेना में 37 वर्ष की सेवा दे चुके हैं। उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा समय समय पर सम्मानित किया जा चुका है। वह मिजोरम, नागालैंड व कश्मीर समस्या को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। वे ब्रिटिश आर्मी स्कूल ऑफ इंफेंट्री में चार वर्ष तक भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ले.ज. ओपी कौशिक लंदन में भारत उच्चायोग में सहायक सैन्य सलाहकार के पद पर भी रह चुके हैं। सेवा के दौरान उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा सम्मान सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। 

आलोक जोशी, पूर्व रॉ चीफ: आलोक जोशी 1976 बैच के हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें 2005 में आईबी का ज्वाइंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया था। वर्ष 2010 में उन्हें रॉ का विशेष सचिव बनाया गया। इसके बाद उन्होंने 30 दिसंबर 2012 को सेक्रेटरी (आर) का पदभार संभाला।

द्वितीय सत्र- आंतरिक सुरक्षा और सुरक्षा बलों का प्रशिक्षण व आधुनिकीकरण

मॉडरेटर- संजय अभिज्ञान, संपादक, अमर उजाला, उत्तराखंड

मुख्य वक्ता:- लेफ्टिनेंट जनरल एसके झा: ले.जनरल एसके झा भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के 48वें कमांडेंट हैं। इससे पहले वे नार्थ ईस्ट में जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। ले्.जनरल झा 13 दिसंबर 1980 को सिक्ख रेजीमेंट की 17वीं बटालियन में कमीशंड हुए थे। वे राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन असम राइफ ल्स सेक्टर और नार्थ ईस्ट में माउंटेन डिवीजन को भी कमांड कर चुके हैं। झा इंडियन मिलिट्री टीम भूटान और आर्मी वार कॉलेेज में इंस्ट्रक्शनल ड्यूटी पर भी रहे हैं। उन्हें इस दौरान कई गैलेंट्री समेत अन्य अवार्ड मिले हैं। 

लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गंभीर सिंह नेगी: ले.ज. गंभीर सिंह नेगी भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्व कमांडेंट रह चुके हैं। यहां उनका कार्यकाल 2003 से 2004 तक रहा है। उन्होंने 39 वर्ष भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद ले.ज. गंभीर सिंह नेगी उत्तराखंड पब्लिक सर्विस के चेयरमैन व सैनिक कल्याण परिषद उत्तराखंड के चेयरमैन भी रह चुके हैं। सैन्य सेवा के दौरान उन्हें कई अवार्ड मिल चुके हैं। 

लेफ्टिनेंट जनरल(सेनि.) केके खन्ना: ले.ज. के के खन्ना ऐसे अफसर रहे हैं जिन्होंने हमेशा से ही अशांत क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। वह जम्मू एवं कश्मीर एनकाउंटर के दौरान घायल भी हो चुके हैं। अपनी सेवाओं के दौरान उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल समेत कई अवार्ड मिल चुके हैं। वे गोल्डन की डिविजन  के जीओसी और फिर बाद में भारतीय सैन्य अकादमी के कमांडेंट रह चुके हैं। वे पहले जनरल रहे हैं जिन्होंने 59 वर्ष की आयु में अकेले उड़ान भरी थी। 

आईपीएस अशोक कुमार (महानिदेशक कानून व्यवस्था एवं अपराध, उत्तराखंड पुलिस): आईपीएस अशोक कुमार ने 1990 को भारतीय पुलिस सेवा ज्वाइन की थी। वर्तमान में वह उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था एवं अपराध के पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह आईजी गढ़वाल, आईजी कुमाऊं का पद भी संभाल चुके हैं। यही नहीं कुमार सीआरपीएफ व बीएसएफ में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्हें 2001 में यूएन मेडल व 2006 में इंडियन पुलिस मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। वे एक अच्छे लेखक के तौर पर भी जाने जाते हैं। उनकी पुस्तक खाकी में इंसान काफी लोकप्रिय हुई है। इसके अलावा वे आंतरिक सुरक्षा पर भी एक पुस्तक लिख चुके हैं। 

तृतीय सत्र: विषय:सैनिक कल्याण एवं सेवानिवृत्ति के बाद गरिमा 

मॉडरेटर: पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी 

मुख्य वक्ता: मेजर जनरल (सेनि.) डॉ. गगनदीप बख्शी: मे.ज. जीडी बख्शी भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी और एक प्रतिष्ठि लेखक हैं। वे जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स का हिस्सा रह चुके हैं। उन्हें कारगिल युद्ध में एक बटालियन का नेतृत्व करने के लिए विष्टि सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा में बोस:एन इंडियन समुराय ए मिलिट्री एसेसमेंट नेताजी एंड द आईएनए पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक पर देश विदेश में कई परिचर्चा भी नेताजी सुभाष चंद बोस के विषय में हो चुकी हैं। 

चतुर्थ सत्र: देश की सुरक्षा में उत्तराखंड का योगदान 
मॉडरेटर: सतीश शर्मा, एडिटर गढ़वाल पोस्ट 

मुख्य वक्ता: तरुण विजय, पूर्व राज्यसभा सांसद: तरुण विजय पत्रकार एवं चिंतक के रूप में पहचाने जाते हैं। 1986 से 2008 तक करीब 22 सालों तक आरएसएस के मुखपत्र पंचजन्य के संपादक रह चुके हैं। वर्तमान में वह डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के डायरेक्टर के पद पर हैं। वे राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। 

ब्रिगेडियर (सेनि.) केजी बहल: ब्रि. केजी बहल वर्ष 1963 में भारतीय सैन्य अकादमी से पासआउट हुए थे। वह मिलिट्री ऑपरेशन डायरेक्ट्रेट में भी तीन साल तक सेवाएं दे चुके हैं। इसके साथ ही बहल हाई पावर्ड नेशनल कमेटी ऑन रिवाइटिलाइजेशन ऑफ लैंड रिवेन्यू के सदस्य भी रहे हैं। ब्रिगेडियर बहल ने देश व राज्य में कई सुधारात्मक कार्यों में योगदान दिया है। 

विशिष्ट अतिथि - जनरल वीके सिंह (रि), केंद्रीय राज्य मंत्री : थलसेना प्रमुख रहे जनरल वीके सिंह वर्तमान में गाजियाबाद से सांसद और केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राष्ट्रीय राज्यमार्ग राज्य मंत्री है। जनरल के पद तक पहुंचने वाले प्रथम प्रशिक्षित कमांडो थे। भारतीय सेना के 26 वें थलसेना अध्यक्ष को अपने कार्यकाल में परम विशिष्ट सेना मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल व ए़डीसी से अलंकृत किये जा चुके हैं। 

आईपीएस अनिल रतूड़ी (पुलिस महानिदेशक, उत्तराखंड): डीजीपी अनिल रतूड़ी वर्ष 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वे नेशनल पुलिस एकेडमी हैदराबाद के सहायक निदेशक भी रह चुके हैं। वे लखनऊ के एसपी सिटी, एसपी पीलीभीत और रायबरेली, एसएसपी आजमगढ़, इटावा और मेरठ रहे हैं। सेवा के दौरान वर्ष 2011 में प्रेसीडेंट पुलिस मेडल,2003 में पुलिस मेडल से नवाजा जा चुका है। 

लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नेगी: लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नेगी उत्तराखंड मूल के हैं। वह दो कार्फ के कमांडर थे। वर्तमान में वह स्ट्रैजिक फोर्सेस कमांड के कमांडर हैं। इस कमान को स्ट्रैजिक न्यूक्लियर कमांड के रूप में भी जाना जाता है। यह न्यूक्लियर कमांड आथॉरिटी का हिस्सा होती है।

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