मोदी के मिशन के लिए उत्तराखंड में RSS एक्टिव
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर विदेश में जा-जाकर वहां के प्रवासी भारतीय उद्यमियों को हिंदुस्तान आकर निवेश करने और देश के नवनिर्माण में हाथ बंटाने की अपील कर रहे हैं तो उनके मिशन को मजबूत करने, देश की प्रतिभा को देश के निर्माण में ही लगाने के संकल्प के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी आगे आ रहा है।
पांच दिन बाद इस अभिनव अभियान का आरंभ उत्तराखंड की पुण्यभूमि हरिद्वार से होने जा रहा है। देश के टेक्नोक्रेट और तकनीकी शिक्षा पा रहे छात्रों को संघ के इस सपने से जोड़ने के लिए 28 नवंबर से यहां नवसृजन शिविर की शुरुआत हो रही है।
शिविर में देश की बड़ी हस्तियों को बुलाया गया है। विशेष रूप से भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान और तकनीकी शिक्षा से जुड़े स्नातक और परास्नातक उन छात्रों को न्यौता दिया गया है, जो अपने करिअर की शुरुआत में हैं।
शिविर की खास बात यह भी है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत म्यांमार, थाईलैंड, श्रीलंका आदि पड़ोसी देशों के छात्रों को शिविर में बौद्धिक ज्ञान देंगे, ताकि वे अपने देश में जाकर संघ की सांस्कृतिक और सामाजिक सोच का प्रसार करें।
रणनीति को धार देंगी ये हस्तियां
देश में मोदी सरकार बनने के बाद भारत को विश्व गुरु बनाने की रणनीति को धार देने में जुटे संघ ने तय तरीकों में थोड़ा फेरबदल किया है। संघ ने भावी टेक्नोक्रेट और भविष्य के उद्यमियों को देश के नव निर्माण से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया है।
नव सृजन शिविर में उन्हें भी न्यौता गया है, जो समाज में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। इनमें सिविल सर्विसेज परीक्षा के लिए गरीब मेधावियों को मुफ्त तैयारी कराने वाले बिहार के मशहूर कोचिंग सेंटर सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार, केंद्रीय मंत्री व युवाओं के प्रेरणा श्रोत राज्यवर्धन सिंह राठौर आदि हैं। इसके साथ ही देश के वरिष्ठ विज्ञानियों को भी बुलाया गया है।
सरसंघ चालक मोहन भागवत करिअर की शुरुआत करने वाले टेक्नोक्रेट का माइंड सेट तो तैयार करेंगे ही साथ में वह तकनीकी संस्थानों के एमडी, प्राचार्य और मालिकों से भी बात करेंगे कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए छात्र-छात्राओं का कैसा माइंड सेट तैयार किया जाए।
इसलिए हो रही उत्तराखंड से शुरुआत
प्रतिभा पलायन के खिलाफ शुरुआत उत्तराखंड से करने केपीछे संघ पदाधिकारियों का तर्क है कि उत्तराखंड देश की आध्यात्मिक राजधानी है। स्वामी विवेकानंद ने 1890 में कोलकाता से देहरादून होते हुए अल्मोड़ा जाकर साधना की थी।
आदिगुरु शंकराचार्य भी यहां आए थे। उत्तराखंड देव शक्ति का केंद्र है। यहां से शुरुआत सांकेतिक महत्व है और इसका देशव्यापी प्रभाव होगा।
इनका है कहना
नवसृजन शिविर में टेक्नोक्रेट कैरियरिस्ट के जेहन में यह बात बैठाई जानी है कि डिग्रियां लेकर वे विदेश न भागें। अपने देश में ही काम करें और रोजगार के अवसर पैदा करें जिससे राष्ट्र मजबूत हो। शिविर में पांच हजार लोगों को शिरकत करनी है। इनमें उत्तराखंड पढ़ने आए अलग-अलग प्रांतों के छात्रों को शामिल किया जा रहा है जिससे सारे देश का प्रतिनिधित्व हो सके।
-डॉ. हरीश रौतेला, प्रांत प्रचारक