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भूकंप की वजह से विलुप्त हो गई हिंदुओं की यह प्रमुख नदी

Sat, 09 May 2015 12:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 09 May 2015 12:16 PM IST
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river saraswati disappeared by earthquake, says scientist.

प्रख्यात भूवैज्ञानिक और पद्मभूषण डॉ. केएस वल्दिया का कहना है कि सरस्वती नदी के लुप्त होने के पीछे भूकंप मुख्य कारण था। यह नदी हिमालय से निकलती थी। हाल के दिनों में सरस्वती को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच डॉ. वल्दिया का कहना है कि सरस्वती की दो शाखाएं टौंस और सतलुज थीं।

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सरस्वती के साथ समाप्त हुई हड़प्पा
इनमें ईसा से 3700 वर्ष पूर्व के आसपास पश्चिमी शाखा यानि टौंस शाखा पश्चिम की ओर मुड़कर यमुना में मिल गई और पूर्वी शाखा भी ईसा से 2500 वर्ष पूर्व के आसपास पश्चिम की ओर मुड़ गई और सरस्वती लुप्त हो गई। सरस्वती लुप्त हुई तो हड़प्पा की प्राचीन सभ्यता भी समाप्त हो गई।
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डॉ. वल्दिया ने शुक्रवार की शाम यहां अपने आवास पर सरस्वती को लेकर चल रही जिज्ञासा को शांत करते हुए कहा कि वह इस लुप्त नदी के बारे में वर्ष 1968 से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने एक बार इस नदी के बारे में भाषण भी दिया था।

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पूर्व इसरो प्रमुख धवन भी मानते थे थ्योरी में दम

river saraswati disappeared by earthquake, says scientist.

इस भाषण से इसरो के प्रमुख सतीश धवन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पुस्तक लिखने को कहा। पुस्तक को प्रकाशित करने के लिए इसरो ने सहयोग दिया था। वर्ष 2010 में इसी पुस्तक का हिंदी संस्करण प्रकाशित हुआ।

डॉ. वल्दिया कहते हैं कि सरस्वती के बारे में विवरण ऋग्वेद और महाभारत काल में भी मिलता है। वह कहते हैं कि सरस्वती महाभारत काल तक सूख चुकी थी। सरस्वती की जो दो शाखाएं टौंस और सतलुज के नाम से थी वह दोनों पटियाला के पास मिलती थी।

शाखाओं (धाराओं) की चौड़ाई छह से दस किलोमीटर तक थी। डॉ. वल्दिया कहते हैं कि सरस्वती के किनारे ही हड़प्पा की सभ्यता का उदय हुआ था लेकिन सरस्वती के सूखने के बाद हड़प्पा की सभ्यता भी लुप्त हो गई।

1968 से कर रहे हैं अध्ययन

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उन्होंने कहा कि आज सरस्वती के अस्तित्व के बारे में सेटेलाइट से अध्ययन हो रहा है और इस नदी का अस्तित्व होने की बात कही जा रही है जबकि वह 1968 से ही इस लुप्त नदी के बारे में अध्ययन कर रहे हैं। 1998 में उन्होंने नदी के अस्तित्व पर गहन अध्ययन कर लिया था।

भूकंप के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा
भूवैज्ञानिक डॉ. केएस वल्दिया ने साफ शब्दों में कह दिया कि वह भूकंप की घटनाओं के बारे में एक भी शब्द नहीं बोलेंगे। उनसे जब भूकंप आने के कारणों के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने मुंह बंद कर दिया और कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। इसका कोई कारण उन्होंने नहीं बताया।

डॉ. वल्दिया का आज होगा सम्मान
पद्मभूषण मिलने के बाद पहली बार अपने गृहनगर पिथौरागढ़ पहुंचे डॉ. केएस वल्दिया का शनिवार को यहां जिला पंचायत सभागार में विभिन्न संगठनों की ओर से सम्मान किया जाएगा। इसकी सारी तैयारी कर ली गई है।

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